Neem Karoli Baba: क्या सच में चमत्कारी है नीम करोली बाबा का कंबल? जानिए इससे जुड़ी मान्यता और रहस्य

Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा के कैंची धाम स्थित आश्रम में उनके दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं. यहां बाबा को कंबल चढ़ाया जाता है जिसके पीछे एक खास वजह छिपी हुई है.

Published date india.com Published: December 30, 2025 5:44 PM IST
Neem Karoli Baba: क्या सच में चमत्कारी है नीम करोली बाबा का कंबल? जानिए इससे जुड़ी मान्यता और रहस्य

Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा एक दिव्य संत थे जो कि आज भी लाखों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र हैं. नीम करोली बाबा आज दुनिया में नहीं हैं लेकिन फिर भी उनके उपदेश और शिक्षाएं लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. बाबा की शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं और सही रास्ता दिखाती हैं. बाबा ने अपने जीवनकाल में कई ऐसे चमत्कार किए जो कि लोगों को हैरान करते हैं और कुछ लोगों का मानना है कि बाबा स्वंय हनुमान जी का ही अवतार थे. नीम करोली बाबा के भक्त केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी हैं. इसमे फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग से लेकर एप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स का भी शामिल हैं. बाबा नीम करोली के आश्रम में लोग प्रसाद के तौर पर मिठाइयां, फल और पैसे ही नहीं, बल्कि कंबल भी चढ़ाते हैं. कैंची धाम में कंबल चढ़ाने की यह परंपरा काफी समय से चली आ रही है. आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे रहस्य के बारे में.

चमत्कारों से भरा है बाबा का कंबल

प्रत्येक फोटो व तस्वीर में नीम करोली बाबा कंबल ओढ़े नजर आते हैं और उनके आश्रम में जाकर भी लोग कंबल जरूर चढ़ाते हैं. लेकिन बाबा नीम करौली को कंबल क्यों चढ़ाया जाता है इसके पीछे छिपे रहस्य के बारे में शायद कम ही लोगों को पता होगा. बता दें कि बाबा का कंबल चमत्कारों से भरा हुआ था. नीम करोली बाबा के ही एक भक्त रिचर्ड एलपर्ट ने अपने किताब ‘मिरेकल ऑफ लव’ में इस रहस्य से पर्दा उठाया है और बताया है कि क्यों कैंची धाम में कंबल चढ़ाए जाते हैं.

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नीम करोली बाबा के कंबल की कहानी

रिचर्ड एलपर्ट ने अपनी पुस्तक ​’मिरेकल ऑफ लव’ नीम करोली बाबा के चमत्कारी कंबल का जिक्र किया है. पुस्तक के अनुसार फतेहगढ़ के एक बुजुर्ग दंपति नीम करोली बाबा के परम भक्त थे और एक दिन अचानक बाबा उस दंपति से मिलने उनके घर पहुंच गए. बाबा ने उनसे कहा कि आज रात मैं यही रुकने वाला हूं. जिसे सुनकर दंपति बहुत खुश हुआ लेकिन साथ ही परेशान भी हुए और सोचने लगे कि हम गरीब लोग कैसे बाबा का सत्कार करेंगे. उन्होंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार बाबा का खूब आदर-सत्कार किया और भोजन का भी इंतजाम किया. इसके बाद सोने के लिए बाबा को चारपाई और ओढ़ने के लिए कंबल भी दिया.

दंपति वहीं बाबा की चारपाई के पास ही सो गए. रात को दंपति ने देखा कि बाबा कंबल ओढ़कर ऐसे कराह रहे थे जैसे कि उन्हें कोई मार रहा हो. दंपति की रात बहुत मुश्किल से गुजरी. सुबह उठकर बाबा ने कंबल लपेट कर दंपति को दिया और कहा इसे खोले बिना ही गंगा में प्रवाहित कर दो. जब दंपति उस कंबल को गंगा में प्रवाहित करने जा रहे थे तो अचानक से उसका वजन इतना भारी हो गया जैसे कि उसमें ढेर सारा लोहा रखा हो. लेकिन बाबा ने मना किया था कि कंबल नहीं खोलना. इसलिए दंपति ने बाबा के कहे अनुसार गंगा में प्रवाहित कर दिया. इसके एक महीने बाद दंपति का इकलोता बेटा घर आया.

दंपति का बेटा​ ब्रिटिश फौज में सैनिक था और विश्वयुद्ध के दौरान वह सेना में लड़ाई कर रहा था. जिसकी वजह से दंपति बहुत ही चिंतित रहते थे. जब वह सकुशल घर लौटा उसे देखकर मां-बाप की खुशी का ठिकाना न रहा. बेटे ने बताया कि लगभग एक महीने पहले युद्ध में उसके सभी साथी मारे गए और अकेला वह बच गया. उसने बताया कि जब दुश्मन गोलीबारी कर रहे थे तो मुझे एक भी गोली नहीं लगी. दंपति को याद आया कि एक महीने पहले नीम करोली बाबा उनके घर आए थे और रात में कंबल ओढ़कर कराह रहे थे. दोनों समझ गए कि बाबा उस समय अपने चमत्कार से हमारे बेटे की रक्षा कर रहे थे और आज उनकी वजह से ही हमारा बेटा सकुशल लौट आया है. तभी यह मान्यता चली आ रही है कि बाबा को कंबल चढ़ाने से जीवन में आ रही सभी मुश्किलें दूर होती हैं. इसलिए आज भी लोग नीम करोली बाबा को कंबल चढ़ाते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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