Onam 2018: श्रावण शुक्ल की त्रयोदशी तिथि को ओणम मनाया जाता है. केरल के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक ओणम भी है. ओणम के दो दिन महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान लोग खुद सजते हैं, अपने घर सजाते हैं, अच्छे-अच्छे पकवान बनाते हैं, नृत्य करते हैं और रंगोली बनाते हैं. ओणम का त्योहार अधिकांश सितंबर मास में मनाया जाता है. इस बार इसे 24 और 25 अगस्त को मनाया जा रहा है. 24 अगस्त को उथ्रादम (पहला ओणम) और 25 अगस्त को थिरूओणम (प्रमुख ओणम) मनाया जाएगा. ऐसी मान्यता है कि थिरूओणम के दिन असुर राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने आते हैं और उन्हीं की स्वागत में यह पर्व मनाया जाता है. Also Read - केरल, पश्चिम बंगाल से अरेस्‍ट अलकायदा आतंकियों का ये था प्‍लान, पाक हैंडलर से मिल रहे थे आदेश

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इसे खेतों में फसल की उपज के लिए विशेष तौर पर मनाया जाता है. इस मौके पर केरल में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें से एक है नौका रेस. इस त्यौहार की विशेषता यह है कि इसमें लोग मंदिरों में नहीं, बल्कि घरों में पूजा करते हैं.

यह माना जाता है कि थिरूओणम के दिन महाबली घर में पधारते हैं. इसलिए एक दिन पहले उथ्रादम की रात मेंं ही घर की साफ सफाई कर घर को सजा दिया जाता है. फिर थिरूओणम के दिन सुबह पूजा होती है और इसके बाद लोग नाश्ता करते हैं. दोपहर के समय 20 से ज्यादा पकवान बनाए जाते हैं. शाम में दोबारा पूजा होती है. इस दिन घरों में सिर्फ शाकाहार भोजन ही तैयार किया जाता है.

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महत्व:

महाबली एक असुर राजा था और उसी के आदर स्वरुप लोग ओणम का पर्व मनाते हैं. ऐसी मान्यता है कि ओणम के दिन ही राजा महाबली ने भगवान विष्णु से अपनी प्रजा से साल में केवल एक बार मिलने की अनुमति मांगी थी.

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इस त्योहार को फसल पकने की खुशी में भी मनाया जाता है. इसी प्रसन्नता में श्रावण देवता और फूलों की देवी का पूजन हर घर में होता है.

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यह बिलकुल दशहरे की तरह होता है, इसमें 10 दिनों के लिए घरों को फूलों से सजाने का कार्यक्रम चलता है. जिसमें लोग आपस में मिलजुलकर खुशियां मनाते हैं. केरल में इन दिनों केरल में चाय, अदरक, इलायची, काली मिर्च तथा धान की फसल पक कर तैयार हो जाती है और लोग फसल की अच्छी उपज की खुशी में ये त्यौहार मानकार खुशियांं बाटतें हैं.

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