आज अश्विन मास के शुक्लपक्ष की एकादशी है और इसे पुरुषोत्तमी एकादशी (Padmini Ekadashi)भी कहा जाता है. महाभारत में इस एकादशी का नाम समुद्रा एकादशी है. अधिकमास भगवान विष्णु का मास है, इसलिए इस महीने भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. कहते हैं इस दिन का व्रत करने से आपके सारे दुखों से आपको छुटकारा मिल जाएगा और साथ ही बैकुंठ धाम का प्राप्ति होगा. Also Read - Padmini Ekadashi 2020 Date: इस दिन मनाई जाएगी पद्मिनी एकादशी जानें शुभ मुहूर्त और व्रत की कथा

आपको बता दें कि जिस तरह अधिकमास तीन साल में एक बार आता है, उसी प्रकार यह एकादशी भी तीन साल में एक बार आती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ सूर्यदेव का भी विशेष पूजन अर्चन हो जाएगा. ऐसा कहा जाता है कि भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा एक साथ करने जीवन में कई परेशानियों का अंत होता है. अधिकमास में इस एकादशी व्रत का महत्व तो स्वंय भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर और अर्जुन को बताया था. Also Read - Vrat Tyohar In September 2020: गणेश विसर्जन, पितृ पक्ष, पद्मिनी एकादशी समेत ये हैं सितंबर के व्रत त्‍योहार

कब है पद्मिनी एकादशी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर 2020 को शाम 6 बजकर 59 मिनट पर दशमी तिथि का समापन हो जाएगा और इसके ठीक बाद एकदाशी का शुभारंभ हो जाएगा. मान्यता कि जिस दिन से एकादशी तिथि का आरंभ होता है उसी दिन से इस व्रत की पूजा आरंभ हो जाती है. पद्मिनी एकादशी का व्रत रविवार, 27 सितंबर को ही रखा जाएगा. Also Read - Padmini Ekadashi 2018: पढ़ें, कमला एकादशी की पौराणिक व्रत कथा, सभी मनोकामनाएं होंगी पूर्ण

पुरुषोत्तमी एकादशी का महत्व
पुराणों में कहा गया है कि पुरुषोत्तमी एकादशी का व्रत अगर आप करते हैं तो ये एक तरह से सभी तीर्थों और यज्ञों का फल आपको मिलता है, साथ ही पापों से भी मुक्ति मिलती है. इस दिन आप अपने मन से दान कर सकते हैं और इस दिन मसूर की दाल,चना,शहद और पत्तेदार सब्जियां और पराया अन्ने ग्रहण नहीं करते हैं. साथ ही इस दिन नमक का सेवन ना करें और कांसे के बर्तन में खाना ना खाएं.

व्रत की पूजा विधि
पद्मिनी एकादशी व्रत के दिन सुबह जल्दी स्नान करें और पूजा स्थल पर बैठकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजन कार्य आरंभ करें. इस दिन विष्णु पुराण पढ़ें या सुनें. इस व्रत में रात के वक्त भी भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इसलिए रात्रि में भजन और कीर्तन करना चाहिए. व्रत की हर पहर में पूजा का विधान है. एकादशी व्रत में पारण भी पूरे विधि-विधान के साथ करना जरूरी, तभी इसका फल प्राप्त होता है.

पद्मिनी एकादशी शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारम्भ: रविवार, 26 सितंबर शाम 07.00 बजे
एकादशी तिथि पारण: सोमवार, 27 सितंबर शाम 07 बजकर 46 मिनट.