Papankusha Ekadashi 2019 का व्रत काफी फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से सभी प्रकार के पाप नष्‍ट होते हैं.

महत्व
भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इसका महत्व बताते हुए कहा था कि यह एकादशी सभी पापों को नाश करने वाली है. इस दिन पद्मनाभ भगवान की पूजा की जाती है. यह भगवान विष्णु के ही एक रूप हैं. पापरूपी हाथी को इस व्रत के पुण्यरूपी अंकुश से वेधने के कारण ही इसका नाम ‘पापांकुशा एकादशी’ हुआ है. इस दिन मौन रहकर भगवद स्मरण तथा भोजन का विधान है. इस प्रकार भगवान की अराधना करने से मन शुद्ध होता है तथा व्यक्ति में सद्-गुणों का समावेश होता है.

व्रत एवं पूजन विधि

– सुबह-सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान पद्मनाभ का पूजन करें
– माथे पर सफ़ेद चन्दन लगाएं और पंचामृत, पुष्प और फल चढ़ाएं.
– इस व्रत में आप शाम को आहार ग्रहण कर सकते हैं. भोजन करने से पूर्व भगवान आरती व पूजन जरूर कर लें.
– एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता और इस दिन क्रोध न करें, कम बोलें और व्यवहार नियंत्रित करें.

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व्रत कथा
एक समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था. वह बड़ा क्रूर था. उससे बहुत से पाप हुए थे. जब उसकी मृत्यु का समय नजदीक आया तो वह महर्षि महर्षि अंगिरा के आश्रम में गया. उसने महर्षि से प्रार्थना की कि मुझसे जीवन में बहुत पाप हुए हैं. हमेशा लोगों की बुरा किया है. इसलिए अब कोई ऐसा उपाय है जिससे मैं अपने सारे पाप धो सकूं और मोक्ष को प्राप्त करूं.

उसकी प्रार्थना पर हर्षि अंगिरा ने उसे पापांकुशा एकादशी का व्रत करके को कहा. महर्षि अंगिरा के कहे अनुसार उस बहेलिए ने पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत किया और किए गए सारे पापों से छुटकारा पा लिया.

शुभ मुहूर्त
8 अक्‍टूबर, मंगलवार दोपहर 2:50 बजे से आरंभ
9 अक्‍टूबर, बुधवार शाम 5:19 बजे तक.

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