Papankusha Ekadashi 2019 का व्रत रखने के बाद अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को व्रत का पारण किया जाता है.

इस एकादशी को काफी फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से सभी प्रकार के पाप नष्‍ट होते हैं. पर जिस विश्‍वास से ये व्रत किया जाता है, उसी श्रद्धा से इसका पारण भी करना चाहिए.

क्‍या होता है पारण
एकादशी व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं. एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद यानी द्वादशी ति‍थि को पारण किया जाता है.

कब करें पारण
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी ति‍थि को हरि वासर के दौरान नहीं करना चाहिए. जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए. हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि को कहते हैं.

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पारण विधि
द्वादशी तिथि को स्‍नान के बाद भगवान विष्‍णु का ध्‍यान करें. इस दिन ब्राह्मण को पहले भोजन कराना चाहिए. जो ऐसा करने में असमर्थ हों, तो ब्राह्मण भोजन के निमित्त कच्चा सामान (सीधा) मंदिर में दान करें.

पारण मुहूर्त
तिथि: 10 अक्‍टूबर, शुक्रवार
पारण समय: सुबह 6:35 बजे से 8:55 बजे तक.

महत्व
भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इसका महत्व बताते हुए कहा था कि यह एकादशी सभी पापों को नाश करने वाली है. इस दिन पद्मनाभ भगवान की पूजा की जाती है. यह भगवान विष्णु के ही एक रूप हैं. पापरूपी हाथी को इस व्रत के पुण्यरूपी अंकुश से वेधने के कारण ही इसका नाम ‘पापांकुशा एकादशी’ हुआ है. इस दिन मौन रहकर भगवद स्मरण तथा भोजन का विधान है. इस प्रकार भगवान की अराधना करने से मन शुद्ध होता है तथा व्यक्ति में सद्-गुणों का समावेश होता है.

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