नई दिल्ली:   आज अधिकमास की अंतिम एकादशी यानी परम एकादशी है। परम एकादशी को विशेष माना गया है. परम एकादशी (Parma Ekadashi 2020 ) का व्रत जो महीना अधिक हो जाता है उसपर निर्भर करता है इसीलिए परम एकादशी का उपवास करने के लिए कोई चन्द्र मास तय नहीं है. अधिक मास को मलमास, पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है. इस एकादशी को अधिक मास एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि परम एकादशी पर व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. Also Read - Papankusha Ekadashi 2020: जानें कब है पापांकुशा एकादशी, ये है व्रत की मान्यता जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

परम एकादशी का महत्व
महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को परम एकादशी व्रत का महत्व बताया था. श्रीकृष्ण ने अर्जुन बताया था कि एकादशी का व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ है. यह व्रत मोक्ष प्रदान करता है और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है. Also Read - Parama Ekadashi 2020 Date & Time: कल है परम एकादशी ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व

परम एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण रहता था. उसकी स्त्री का नाम पवित्रा था. वह परम सती और साध्वी थी. वे दरिद्रता और निर्धनता में जीवन निर्वाह करते हुए भी परम धार्मिक थे और अतिथि सेवा में तत्पर रहते थे. एक दिन गरीबी से दुखी होकर ब्राह्मण ने परदेश जाने का विचार किया, किंतु उसकी पत्नी ने कहा- ‘’स्वामी धन और संतान पूर्वजन्म के दान से ही प्राप्त होते हैं, अत: आप इसके लिए चिंता ना करें.’’ Also Read - Adhik Maas Tulsi Puja: अधिक मास में जरुर करें तुलसी की पूजा, होगी ऐश्वर्य की प्राप्ति और मिलेगा शुभ फल

एक दिन महर्षि कौडिन्य उनके घर आए. ब्राह्मण दंपति ने तन-मन से उनकी सेवा की. महर्षि ने उनकी दशा देखकर उन्हें परमा एकादशी का व्रत करने को कहा. उन्होंने कहा- ‘’दरिद्रता को दूर करने का सुगम उपाय यही है कि, तुम दोनों मिलकर अधिक मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत तथा रात्रि जागरण करो. इस एकादशी के व्रत से यक्षराज कुबेर धनाधीश बना है, हरिशचंद्र राजा हुआ है.’’

ऐसा कहकर मुनि चले गए और सुमेधा ने पत्नी सहित व्रत किया. प्रात: काल एक राजकुमार घोड़े पर चढ़कर आया और उसने सुमेधा को सर्व साधन, संपन्न, सर्व सुख समृद्ध कर एक अच्छा घर रहने को दिया. इसके बाद उनके समस्त दुख दर्द दूर हो गए.

परम एकादशी पूजा विधि

परम एकादशी का व्रत कठिन व्रतों में से एक माना गया है. इस व्रत को निर्जला भी रखा जाता है. जिस दिन से एकादशी की तिथि का आरंभ होता है उसी दिन व्रत के नियमों का पालन आरंभ हो जाता है. लेकिन व्रत का संकल्प उदयतिथि के दिन ही लिया जाता है. व्रत का संकल्प लेने से पहले स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र पहन कर पूजा स्थान पर बैठकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद पूजन शुरू करना चाहिए. इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है. व्रत के पारण के बाद दान आदि का कार्य भी करना श्रेष्ठ माना गया है.