Parivartini Ekadashi 2019: परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. इस एकादशी का काफी महत्‍व बताया गया है. Also Read - Parivartini Ekadashi 2020: परिवर्तिनी एकादशी आज इस बार बन रहा है खास संयोग, जानें शुभ मुहूर्त

परिवर्तिनी एकादशी को पद्मा एकादशी भी कहा जाता है. इस दिन व्रत रखने की परंपरा है. लोग भगवान विष्‍णु का पूजन करते हैं और कथा कहते हैं. Also Read - Parivartini Ekadashi 2020 Date & Time: परिवर्तिनी एकादशी पर ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, जानें इसका महत्व

इस बार 9 सितंबर, सोमवार को है. इस व्रत में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने का काफी महत्‍व है. Also Read - परिवर्तिनी एकादशी 2019: जानें कब समाप्‍त होगा हरि वासर, पारण विधि व शुभ मुहूर्त...

व्रत कथा
त्रेता युग में भगवान विष्णु का महान भक्त राजा बलि हुआ. राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी वो भगवान विष्णु का बड़ा भक्त था. उसकी नियमित भक्ति और प्रार्थनाओं से भगवान विष्णु प्रसन्न हो उठे.

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राजा बलि राजा विरोचन के पुत्र और प्रहलाद के पौत्र थे और ब्रह्मणों की सेवा करते थे. इस प्राकर अपने तप, पूजा और विनम्र स्वभाव के कारण राजा बलि ने अनेकों शक्तियाँ अर्जित कर लीं और इन्द्र के देवलोक के साथ त्रिलोक पर अधिकार कर लिया. इससे देवता लोकविहीन हो गए.

इन्द्र को उसका राज्य वापस दिलवाने के लिए भगवान विष्णु को वामन अवतार लेना पड़ा. वे वामन अर्थात् बौने ब्रह्माण का रूप धरकर राजा बलि के पास गए और उनसे अपने रहने के लिए तीन कदम के बराबर भूमि देने का आग्रह करने लगे. वामन रूप में भगवान ने एक हाथ में लकड़ी का छाता रखा हुआ था. गुरू शुक्रचार्य के मना करने के बावजूद राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि देने का वचन दे डाला.

वचन सुनकर वामन अवतार अपना आकार बढ़ाते गए और उन्होंने इतना आकार बढ़ा लिया कि पहले कदम में पूरी पृथ्वी को नाप लिया, दूसरे कदम में देवलोक को नाप लिया. उनके तीसरे कदम के लिए कोई भूमि ही नहीं बची. तब वचन के पक्के राजा बलि ने कदम रखने के लिए उन्हें अपना सिर प्रस्तुत किया.

वामन रूप रखे भगवान विष्णु राजा बलि की भक्ति और वचनबद्धता से अत्यंत प्रसन्न हो गए और राजा बलि को पाताल लोक का राज्य दे दिया. इसके साथ ही भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया कि चतुर्मास अर्थात चार माह में उनका एक रूप क्षीर सागर में शयन करेगा और दूसरा रूप राजा बलि के पाताल में उस राज्य की रक्षा के लिए रहेगा.