Paush Amavasya 2019: ज्योतिष के अनुसार पौष मास में कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को पौष अमावस्या कहते हैं. जो कि 26 दिसंबर दिन गुरुवार को है. पौष मास की अमावस्या का बड़ा महत्व है. क्योंकि कई धार्मिक कार्य अमावस्या पर किये जाते हैं. पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन तर्पण व श्राद्ध किया जाता है. वहीं पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए इस दिन उपवास रखा जाता है. पौष माह में सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्व है. मान्यता है कि पौष मास में सूर्य की पूजा करने से सभी कष्ट मिट जाते हैं और घर में अपार खुशियां आती हैं.

पौष अमावस्या का मुहूर्त
दिसंबर 25, 2019 को 11:19:46 से अमावस्या आरम्भ
दिसंबर 26, 2019 को 10:45:19 पर अमावस्या समाप्त

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पौष अमावस्या का धार्मिक महत्व
ज्योतिष के अनुसार, पौष मास की अमावस्या को बहुत ही पुण्य फलदायी बताया गया है. धार्मिक और आध्यात्मिक चिंतन-मनन के लिए यह माह श्रेष्ठ होता है. पौष अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए उपवास रखने से न केवल पितृगण बल्कि ब्रह्मा, इंद्र, सूर्य, अग्नि, वायु, ऋषि, पशु-पक्षी समेत भूत प्राणी भी तृप्त होकर प्रसन्न होते हैं. पौष मास में होने वाले मौसम परिवर्तन के आधार पर आने वाले साल में होने वाली बारिश का अनुमान लगाया जा सकता है.

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कैसे करें पौष अमावस्या का व्रत

  • पौष अमावस्या पर पितरों को तर्पण करने का विशेष महत्व है. अत: इस दिन पवित्र नदी, जलाशय या कुंड आदि में स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों का तर्पण करें.
  • तांबे के पात्र में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए.
  • पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास करें और किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें.
  • जिन व्यक्तियों की कुंडली में पितृ दोष और संतान हीन योग उपस्थित है. उन्हें पौष अमावस्य का उपवास कर पितरों का तर्पण अवश्य करना चाहिए.
  • अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ का पूजन करना चाहिए और तुलसी के पौधे की परिक्रमा करनी चाहिए.
  • मान्यता है कि पौष अमावस्या का व्रत करने से पितरों को शांति मिलती है और मनुष्य की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

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