नई दिल्‍ली: फाल्गुन महीने में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलैरा दूज मनाई जाती है और इसी पर्व के साथ ही होली के रंगों की शुरुआत हो जाती है. इस दिन को फाल्गुन माह का सबसे शुभ दिन माना जाता है. इस दिन गांवों में सभी बच्चे फूलों को तोड़कर इसकी रंगोली बनाते है. इस साल फुलैरा दूज 08 मार्च, शुक्रवार को सुबह 11: 48 बजे से लेकर 12: 24 बजे तक रहेगा.

फुलैरा दूज को लेकर कहा जाता है कि जब खेतों में सरसों के पीले फूलों की मनभावन महक उठने लगे. जहां तक नजर जाए दूर-दूर तक केसरिया क्यारियां नजर आएं. शरद की कड़ाके की ठंड के बाद सूरज की गुनगुनी धूप तन और मन दोनों को प्रफुल्लित करने लगे. खेतों की हरियाली और जगह-जगह रंग-बिरंगे फूलों को देखकर मन-मयूर नृत्य करने लगे तो समझो बंसत ऋतु अपने चरम पर है. बचपन से युवा अवस्था में कदम रखने वाले अल्हड़ युवक-युवतियां इस मौसम की मस्ती में पूरी तरह से डूब जाना चाहते हैं. किसानों की फसल खेतों में जैसे-जैसे पकने की ओर बढ़ने लगती है. तभी रंगों भरा होली का त्योहार आ जाता है. होली से कुछ दिन पहले आती है ‘फुलैरा दूज’. इन फूलों को भी घर में बनाई गई होली यानी रंगोली पर सजाया जाता है.

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ऐसे मनाएं फुलैरा दूज
इस दिन घर में भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है और अपने इष्ट देव को गुलाल चढ़ाया जाता है.
इस दिन मिष्ठान बनाया जाता है और उन्हें भगवान को भोग लगाया जाता है.
यह दिन नए काम की शुरुआत के लिए बहुत शुभ है. नए काम की शुरुआत इस दिन से कर सकते है.

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फुलैरा दूज का शुभ मुहूर्त
इस साल फुलैरा दूज आठ मार्च, शुक्रवार को है. वैसे तो इस बार पूरे दिन ही पूजा की जा सकती है. लेकिन शुभ मुहूर्त की बात करें तो यह सुबह 11: 48 बजे से लेकर 12: 24 बजे तक रहेगा.

फुलैरा दूज का महत्व
कहा जाता है कि इस दिन का हर क्षण शुभ और पवित्र होता है. फुलैरा दूज का पर्व मथुरा और वृंदावन में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पूजा की जाती है. इस दिन सभी मंदिरों को तरह-तरह के रंग बिरंगे फूलों से सजाया जाता है और फूलों की होली खेली जाती है. फुलैरा दूज का दिन विवाह के लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है.

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