Pitru Paksha 2018: 24 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो गया है और पितृपक्ष का दूसरा दिन है. पितृपक्ष के दूसरे दिन उन लोगों का श्राद्ध होता है, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि पर हुई हो. इस दिन नाना-नानी का श्राद्ध भी किया जा सकता है. Also Read - यूपी: शादी के बाद पत्‍नी ने धर्म परिवर्तन से किया इनकार, तो पति ने गला काटकर कर दी हत्‍या

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दरअसल, पितृपक्ष पितृ ऋण से मुक्ति का एक रास्ता है. जब संतान श्राद्ध करती है तो पिता को पुत नाम के नरक के कष्टों से मुक्ति मिलती है. लेकिन अगर आपको यह लगता है कि पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कोई भी श्राद्ध कर सकता है, तो आप गलत हैं. क्योंकि यह एक तरह से कर्ज उतारने की प्रक्रिया है. इसलिए पूर्वजों से जो ऋण मिला है, उसे संतान को ही चुकाना होगा. Also Read - Pitru Paksha 2020 Date: इस तारीख से शुरू हो रहे हैं पितृपक्ष, कब होगा पूर्णिमा-अमावस्या श्राद्ध, जानें हर बात

Pitru Paksha 2018 2nd Day Shradh Muhurt: पितृपक्ष के दूसरे दिन किसका होता है श्राद्ध, जानिये मुहूर्त

जानिये, श्राद्ध का अधिकार किसे है:

1. श्राद्ध का पहला अधिकार पिता या माता के बड़े बेटे का होता है.

2. अगर वह नहीं है तो छोटा बेटा श्राद्ध करता है.

3. सभी भाई अलग-अलग रहते हैं तो सभी को अलग-अलग पितरों का श्राद्ध करना चाहिए.

4. पुत्र नहीं है तो पौत्र या प्रपौत्र श्राद्ध कर सकते हैं.

5. पुत्र ना होने पर भाई श्राद्ध कर सकता है.

6. किसी पुरुष की शादी नहीं हुई है तो ऐसी स्थिति में उसका श्राद्ध मां या बहन कर सकती हैं.

Pitru Paksha shradh 2018: जानिये, श्राद्ध में क्या करें और क्या नहीं

7. यदि बेटा नहीं है तो बेटे की पत्नी श्राद्ध कर सकती है.

8. बेटे के अलावा पोता और परपोता भी अपने मृत दादा-दादी, परदादी का श्राद्ध कर सकते हैं.

9. अगर वो नहीं है तो भाई-भतीजे या उनका बेटा भी श्राद्ध कर्म कर सकता है.

10. बेटी के पुत्र को भी श्राद्ध का अधिकार होता है.

11. मातृकुल के पितरों का श्राद्ध भी पुत्रों को करना चाहिए.

12. विधवा स्त्री के कुल में अगर कोई न हो तो वह भी पितरों का श्राद्ध करा सकती है.

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