Pitru Paksha 2019: देश-विदेश में मोक्षस्थली के नाम से चर्चित बिहार के गया में पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए किए गए पिंडदान की सामग्री से अब खाद बनेगी. इसके लिए गया में विशेष रूप से पांच मशीनें मंगवाई गई हैं. Also Read - Mahalaya 2019: महालया तिथि, महत्‍व, चक्षु दान, होती है दुर्गा पूजा की शुरुआत...

जिला प्रशासन का कहना है कि पिंडदान के लिए गया में पितृपक्ष मेलों में लोगों द्वारा किए गए पिंडदान की सामग्रियों को अक्सर जहां-तहां फेंक दिया जाता था. या नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है, जिससे जल प्रदूषण होता है. Also Read - Sarva Pitru Amavasya 2019: सर्व पितृ अमावस्‍या कब, श्राद्ध में इस दिन का इतना महत्‍व क्‍यों?

अब इस पिंडदान सामग्री से पटना में ही खाद बनाई जाएगी. Also Read - Pitru Paksha 2019: 300 साल पुराने बहीखातों में दर्ज है पूर्वजों के नाम, कहा जाता है पंडा-पोथी...

पुनपुन में पटना नगर निगम, फुलवारीशरीफ और मसौढ़ी नगर परिषद के अधिकारियों को पिंड सामग्रियों को इकट्ठा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि गया में यह काम गया नगर निगम को सौंपा गया है.

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पुनपुन से प्रत्येक दिन औसतन दो से तीन टन पिंडदान सामग्री निकलती है, जबकि गया में इसकी मात्रा कहीं अधिक होती है. हिंदू परंपरा के मुताबिक, गया में पिंडस्थानों पर पिंडदान के पहले पहला पिंड पुनपुन नदी के किनारे दिए जाने का प्रावधान है.

गया के जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि गया में पिंड सामग्री से खाद बनाने के लिए विष्णुपद में तीन और अक्षयवट में दो ग्रीन कंपोस्टर लगाए गए हैं. इसकी क्षमता पांच सौ किलोग्राम की है. इसमें पांच क्विंटल कचरा और पिंड (आटा) डालने पर एक क्विंटल जैविक खाद बनेगी.

उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के दौरान काफी मात्रा में पिंड व गीला कचरा निकलता है. इस वर्ष पिंडदान के लिए आठ लाख से ज्यादा लोगों के यहां आने का अनुमान है.

जिलाधिकारी ने कहा कि पिंड में आमतौर पर आटा, जौ, तिल, गुड़, चावल व फूल का प्रयोग किया जाता है. आमतौर पर एक स्थान पर पिंडदान करने के दौरान 16 पिंड दिए जाते हैं. ऐसे में बड़ी मात्रा में सामग्री यत्र-तत्र फेंके जाते थे. इससे गंदगी फैलती थी. अब इन पिंडों को प्रतिदिन एकत्र किया जाएगा और उससे खाद बनाई जाएगी. खाद की पैकेजिंग की जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई है.

पटना के कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पिंडदान सामग्री को एक जगह एकत्रित करने के बाद उसे जमीन में गड्ढा (किट) बनाकर डाला जाएगा. सामग्री के साथ बैक्टीरिया कल्चर बनाने वाला पाउडर भी मिलाया जाएगा. इससे फूल, माला, आटा आदि के सड़ने पर दुर्गंध नहीं आएगी. 45 से 60 दिनों में खाद तैयार हो जाएगी. नाइट्रोजन, पोटैशियम और कैल्शियम युक्त यह खाद पौधों के पोषण और विकास के लिए काफी उपयोगी होगा.

उन्होंने कहा कि पहले पिंड की सामग्री नदी में प्रवाह कर दी जाती थी, इससे नदी में प्रदूषण बढ़ता था. प्रत्येक दिन पिंड सामग्री को पिंडस्थल से हटाया जाएगा और उसे एकत्रित कर उससे खाद बनाई जाएगी.

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