Pitru Paksha 2019: पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है. इस बार पितृ पक्ष 13 सितंबर, शुक्रवार से आरंभ होंगे. अंतिम श्राद्ध 28 सितंबर को होगा.

श्राद्ध में पिंडदान का विशेष महत्‍व होता है. पिंडदान के जरिए पूर्वजों को शांति मिलती है.

क्यों जरूरी है पिंडदान
इंसान भले ही इस संसार में अकेला आता है, लेकिन विषय और संसारिक मोह के बंधनों में बंधकर वह कई रिश्तों की कड़ी बन जाता है. लेकिन मरने के बाद सिर्फ शरीर समाप्त होता है. उसकी आत्मा समाप्त नहीं होती. उसकी आत्मा का आगे का सफर तभी बढ़ता है, जब उसकी कर्मों का सारा हिसाब-किताब हो जाता है.

आत्मा के इसी सफर को आसान बनाने के लिए हिन्दू धर्म में कर्मकांडों की व्यवस्था की गई है. जिसमें सबसे अहम श्राद्ध और पिंडदान को माना जाता है. अपने पित्रों को तर्पण और निमित अर्पण करना उनकी आत्मा की शांति के लिए सबसे जरूरी माना गया है.

कैसे करें पिंडदान
– पिंडदान के समय मृतक के घरवाले जौ या चावल के आटे में दूध और तिल मिलाकर गूथ लें और उसका गोला बना लें.
– तर्पण करते समय पीतल की थाली या बर्तन में साफ जल भरकर उसमें थोड़े सा काला तिल व दूध डालकर अपने सामने रख लें और अपने सामने एक दूसरा खाली बर्तन रख लें.
– दोनों हाथों को एक साथ मिलाकर उस मृत व्यक्ति का नाम लेकर तृप्यन्ताम कहते हुये अंजली में भरे हुये जल को दूसरे खाली पात्र में छोड़ दें.
– जल में काले तिल, जौ, कुशा एवं सफेद फूल मिलकार उस जल से विधिपूर्वक तर्पण किया जाता है, इससे पितर तृप्त होते हैं.
– इसके बाद श्राद्ध के बाद ब्राह्मण को भोजन कराकर यथाशक्ति दान दिया जाता है.

इन 5 बातों का रखें ध्‍यान
1. पिंडदान में दूध, शहद, तुलसी पत्ता, तिल आदि का महत्वपूर्ण होता है.
2. पिंडदान में सोना, चांदी, तांबे, कांसे या पत्तल के पात्र का ही प्रयोग करना चाहिए.
3. कुत्ता, कौआ और गायों को पितृपक्ष के दौरान भोजन जरूर कराएं. ऐसी मान्यता है कि कुत्ता और कौआ पित्रों के करीब होते हैं और गाएं उन्हें वैतरणी पार कराती हैं.
4. श्राद्ध के लिए गया, बद्रीनाथ, हरिद्वार, गंगासागर, पुश्कर, जगन्नाथपुरी, काशी, कुरुक्षेत्र, आदि को सबसे उत्तम स्थान माना जाता है.
5. पिंडदान के लिए यह जरूरी नहीं कि आप किसी श्रेष्ठ जगह ही जाएं या किसी बड़े पंडित को ही बुलाएं. सरल विधि के द्वारा आप घर पर भी श्राद्ध कार्य को कर सकते हैं.