Pitru Paksha 2019: पितृ पक्ष 13 सितंबर से आरंभ हो गए हैं. आज पहला श्राद्ध, यानी पूर्णिमा श्राद्ध है.

श्राद्ध करने के लिए विशेष मुहूर्त की आवश्‍यकता होती है. इस समय में श्राद्ध व तर्पण करना शुभ माना जाता है. शास्‍त्रों में कहा गया है कि श्राद्ध दोपहर के समय में करने चाहिए. इसके लिए तीन मुहूर्त बताए गए हैं.

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कुतुप मुहूर्त- दोपहर 12:10 बजे से 12:59 बजे तक (13 सितंबर)

रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12:59 बजे से 1:48 बजे तक (13 सितंबर)

अपराह्न काल- दोपहर 1:48 बजे से शाम 4:16 बजे तक (13 सितंबर)

शास्‍त्रों में कुतुप को सर्वोत्‍तम, रौहिण को श्रेष्‍ठ और अपराह्न को साध्‍य बताया गया है.

पूर्णिमा तिथि
13 सितंबर सुबह 7:35 से आरंभ
14 सितंबर सुबह 10:02 बजे तक

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क्यों करते हैं श्राद्ध
पितृ-पक्ष में पूर्वजों का तर्पण या श्राद्ध नहीं करने वाले लोगों को पितृदोष का सामना करना पड़ता है. पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म को महत्वपूर्ण माना गया है.

अगर किसी के ऊपर पितृदोष है तो उसे दूर करने के उपाय भी इन्हीं 15 दिनों के दौरान होते हैं. दरअसल पितृपक्ष एक जरिया है अपने पूर्वजों के ऋण को उतारने का.

श्राद्ध का महत्‍व
ऐसी मान्यता है कि जो लोग पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण नहीं कराते, उन्हें पितृदोष लगता है. इससे मुक्ति पाने का सबसे आसान उपाय पितरों का श्राद्ध कराना है. श्राद्ध करने के बाद ही पितृदोष से मुक्ति मिलती है. श्राद्ध करने से पितरों को शांति मिलती हैं. वे प्रसन्‍न रहते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्‍त होता है.