Pitru Paksha 2019: पितृपक्ष 13 सितंबर, शुक्रवार से आरंभ होंगे. अंतिम श्राद्ध 28 सितंबर को होगा. इन 15 दिनों में लोग पितरों का पिंडदान करते हैं.

इस समय में कई काम किए जाते हैं तो कई काम करने की मनाही होती है.

1. पितृपक्ष के दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना शुभ होता है. ऐसा जरूर करें.

2. पिंडदान ऐसे समय में करें, जब छाया पीछे की ओर हो. सुबह या अंधेरे में पिंडदान या श्राद्ध नहीं किया जाता.

3. इस बात का खास ख्याल रखें कि श्राद्ध करते वक्त लोहे के आसन पर नहीं बैठा जाता. अगर आप ब्राह्मणों से पिंडदान करा रहे हैं तो इस बात ध्यान रखें कि लोहे की बनी पीढ़ी या बैठकी पर बैठकर पंडित श्राद्ध ना कराएं.

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4. आमतौर पर केले के पत्ते पर भोजन करना और कराना शुभ माना जाता है. लेकिन श्राद्ध के दौरान श्राद्ध करने और कराने वाले व्यक्ति को केले के पत्ते पर भोजन नहीं करना चाहिए.

5. पिंडदान और श्राद्ध के कई नियम हैं, जिसमें एक जनेऊ धारण करने को लेकर भी है. अगर आप जनेऊ पहनते हैं तो पिंडदान के दौरान उसे बाएं की जगह दाएं कंधे पर रखें.

6. पिंडदान लोहे या स्टील के बर्तन में नहीं किया जाता. इसके लिए कांसे या तांबे या चांदी के बर्तन, प्लेट या पत्तल का प्रयोग करें.

7. पिंडदान करते वक्त तुलसी जरूर रखें.

8. श्राद्ध करते वक्त आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए.

9. पिता का श्राद्ध बेटा या बहूू करते हैं, उनके पोते या पोतियां नहीं करतीं.

10. श्राद्ध के दौरान घर में कलह ना हो, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दौरान पुर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिवार के आसपास ही रहते हैं.

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11. किसी और घर में श्राद्ध ना करें.

श्राद्ध का महत्‍व
ऐसी मान्यता है कि जो लोग पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण नहीं कराते, उन्हें पितृदोष लगता है. इससे मुक्ति पाने का सबसे आसान उपाय पितरों का श्राद्ध कराना है. श्राद्ध करने के बाद ही पितृदोष से मुक्ति मिलती है. श्राद्ध करने से पितरों को शांति मिलती हैं. वे प्रसन्‍न रहते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्‍त होता है.