नई दिल्ली: आज अश्विनी मास की कृष्ण पक्ष दशमी तिथि है. पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली इस दशमी तिथि को दशमी श्राद्ध  (Dashmi Shradh 2020) के नाम से भी जाना जाता है. पितृ पक्ष में दशमी तिथि का खास महत्व होता है. दशमी श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिये किया जाता है, जिनकी मृत्यु दशमी तिथि पर हुई हो. इस दिन शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की दशमी तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है. ऐसा माना जाता कि इस दिन गया कूप में पिंडदान से श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को अश्वमेघ यज्ञ करने का फल मिलता है. Also Read - Pitru Paksha Matri Navami 2020: पितृपक्ष की नवमी आज इस दिन होता है मां का श्राद्ध, जानें इससे जुड़ी खास बातें

दशमी तिथि श्राद्ध  (Dashmi Shradh 2020 Subh Muhurat)का मुहूर्त
दशमी श्राद्ध शनिवार, सितम्बर 12, 2020 को
दशमी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 12, 2020 को 04: 19 ए एम बजे
दशमी तिथि समाप्त – सितम्बर 13, 2020 को 04:13 ए एम बजे Also Read - Pitru Paksha 2020 Vastu Shastra Tips: घर में रखते हैं पूर्वजों की तस्वीर, तो जानें कैसा होना चाहिए वास्तु

दशमी श्राद्ध की ये है  (Dashmi Shradh 2020 puja vidhi) विधि Also Read - Shardiya Navratri 2020: पितृपक्ष के बाद शुरू नहीं होंगे शारदीय नवरात्र, 165 साल बाद बना ये अद्भुत संयोग

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पूजा स्थान पर पूर्वज की तस्वीर स्थापित करने के बाद विधि पूर्वक पूजा आरंभ करें. पूजा आरंभ करने के बाद पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें. भगवान विष्णु की पूजा करें और पितरों का स्मरण करें. पूजा के दौरान पूर्वजों से गलती के लिए क्षमा मांगे और परिवार पर आर्शीवाद बनाए रखने की प्रार्थना करें. पितरों के आगे अग्नि में गाय का दूध, दही, घी और खीर अर्पित करें. पितरों के लिए तैयार किए गए भोजन से चार ग्रास निकाल कर एक ग्रास गाय, दूसरा कुत्ता, तीसरा कौए और चौथा ग्रास अतिथि या मान पक्ष के समाने रखें. पूजा खत्म होने के बाद ब्राह्मण को दान दें.

गीता के दसवें अध्याय का करें पाठ

दशमी श्राद्ध के दिन दान-पुण्य के साथ पितरों के निमित्त भागवत गीता के दसवें अध्याय का पाठ भी जरूर करें. श्राद्धकर्म के बाद दस ब्राह्मणों को इस दिन भोजन खिलाना चाहिए. यदि आप दस ब्राह्मण को भोजन नहीं खिला पा रहे तो कम से कम एक ब्राह्मण का जरूर भोजन कराएं. इस दिन कौवा, गाय, कुत्ता और चींटियों के लिए भी इस दिन भोजन निकालें और अपने हाथों से उन्हें खिलाएं.