वाराणसी: पूर्वजों को तर्पण करने का 17 दिनों का ‘पितृ पक्ष’ (Pitru Paksha 2020) बुधवार से शुरू हो गया है. इन दिनों में लोग अपने प्रियजनों का श्राद्ध करते हैं. श्राद्ध के लिए हर साल भारी मात्रा में लोग हरिद्वार या वाराणसी जाते हैं लेक्म इस साल कोरोना महामारा के कारण लोगों को घर पर रहकर ही अपने पितरों का श्राद्ध करना पड़ रहा है. ऐसे में आज हम आपको वाराणसी की उस जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां लोग भारी मात्रा में आते हैं और पितरों का श्राद्ध करते हैं लेकिन इस साल कोरोना महामारी के चलते यह जगह बिल्कुल वीरान हो गई है. आइए जानते हैं इस जगह के बारे में – Also Read - Dashmi Shradh 2020: आज दशमी श्राद्ध, जानें क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कहा जाता है वाराणसी से ही भगवान शिव ने सृष्टि की रचना की थी. कहते हैं यहां जो इंसान अंतिम सांस लेता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है इसीलिए कई लोग अपने अंतिम समय में काशी में ही आकर बस जाते हैं. वाराणसी में ही एक जगह है जिसका नाम है पिशाच मोचन कुंड. ऐसी मान्यता है कि यहां त्रिपिंडी श्राद्ध करने से पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु से मरने के बाद व्याधियों से मुक्ति मिल जाती है. इसीलिए पितृ पक्ष के दिनों पिशाच मोचन कुंड (pishach kund) पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है. Also Read - Pitru Paksha Matri Navami 2020: पितृपक्ष की नवमी आज इस दिन होता है मां का श्राद्ध, जानें इससे जुड़ी खास बातें

पिशाच कुंड से जुड़ी खास बातें Also Read - Pitru Paksha 2020 Vastu Shastra Tips: घर में रखते हैं पूर्वजों की तस्वीर, तो जानें कैसा होना चाहिए वास्तु

– गरुड़ पुराण में भी इस कुंड के बारे में बताया गया है. कहा जाता है कि पिशाच मोचन मोक्ष तीर्थ स्थल की उत्पत्ति गंगा के धरती पर आने से भी पहले से है.

– मान्यता है कि हजार साल पुराने इस कुंड किनारे बैठ कर अपने पितरों जिनकी आत्माए असंतुष्ट हैं उनके लिए यहा पितृ पक्ष में आकर कर्म कांडी ब्राम्हण से पूजा करवाने से मृतक को प्रेत योनियों से मुक्ति मिल जाती है.

– पिशाच कुंड के पास एक पीपल का पेड़ है जिसे लेकर मान्यता है कि इस पर अतृप्त आत्माओं को बैठाया जाता है.

– मान्यता है कि यदि लोगों के माथे के ऊपर से या सिर के ऊपर से लोहे की कील को तीन बार घुमाकर यहां स्थित पीपल के पेड पर ठोक दिया जाए तो परिवार के ऊपर से प्रेत बाधा हमेशा के लिए खत्म हो जाता है.