बेटियां भी कर सकती हैं पितरों का श्राद्ध...लेकिन पता होने चाहिए शास्त्रों में बताए गए कुछ जरूरी नियम

Pitru Paksha 2025: पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण व श्राद्ध किया जाता है. जो कि घर के पुरुष करते हैं. ऐसे में कई बार में मन में यह सवाल आता है कि क्या महिलाएं श्राद्ध कर सकती हैं?

Published date india.com Published: September 11, 2025 1:56 PM IST
बेटियां भी कर सकती हैं पितरों का श्राद्ध...लेकिन पता होने चाहिए शास्त्रों में बताए गए कुछ जरूरी नियम

Pitru Paksha 2025: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के 15 दिन बहुत ही खास होते हैं क्यों​​कि इस दौरान पितर किसी न किसी रूप में धरती पर आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं. पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण, श्राद्ध कर्म या पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को पितृश्रण से मुक्ति मिलती है. आमतौर पर पितरों का श्राद्ध हमेशा पुरुष करते हैं. ऐसे में मन में यह सवाल उठता है कि यदि घर में पुरुष नहीं है तो क्या महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती हैं या नहीं?

शास्त्रों में किया गया है उल्लेख

वाल्मिकी रामायण में उल्लेख किया गया है कि जब भगवान श्री राम अपनी पत्नी देवी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास पर गए तो इस बीच उनके पिता राजा दशरथ की मृत्यु हो गई. जब प्रभु श्री राम को पिता की मृत्यु का पता चला तो वह फल्गु नदी के तट पर उनका पिंडदान करने पहुंचें.

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पिंडदान के लिए कुछ सामग्री की आवश्यकता थी जिसे लेने के लिए भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण नगर में गए. ऐसे में उन्हें आने काफी विलंब हो रहा था तभी आकाशवाणी हुई कि पिंडदान का समय निकल रहा है. तभी राजा दशरथ की आत्मा ने माता सीता को दर्शन किए और उनसे पिंडदान करने को कहा. तब सीता जी ने फल्गु नदी के तट पर अपने ससुर राजा दशरथ का पिंडदान ​किया. जिससे स्पष्ट होता है कि महिलाएं भी पिंडदान या श्राद्ध कर सकती हैं.

महिलाओं के लिए पिंडदान व श्राद्ध के नियम

  • यदि किसी परिवार में पुत्र नहीं है और केवल पुत्री है तो पिता या माता का पिंडदान पुत्री कर सकती है.
  • अगर किसी महिला की कोई संतान नहीं है और पति का श्राद्ध करना है तो पत्नी को श्राद्ध करने का अधिकार है.
  • इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि पुरुष विवाहित है तो पितरों का श्राद्ध करते पत्नी का साथ में होना जरूरी है. तभी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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