Pitru Paksha shradh – Pratipada Sraddha 2018: 24 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो रहा है. भाद्रपद के शुक्लपक्ष पूर्णिमा से पितृपक्ष शुरू होता है और यह अश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक रहता है. ऐसी मान्यता है कि इन 16 दिनों के दौरान हमारे पूर्वज धरती पर उतरते हैं और पिंडदान को स्वीकार करते हैं.

दरअसल, पिंडदान और श्राद्ध अपने पूर्वजों और पितृ ऋण से मुक्ति का एक तरीका है. ऐसी मान्यता है कि जो लोग इस दौरान पिंडदान नहीं करते उन्हें पितृदोष सहना पड़ता है. पितृपक्ष के दौरान यदि आप श्राद्ध कर रहे हैं तो इन बातों का ख्याल जरूर रखें:

Pitru Paksha 2018: जानिये क्यों करते हैं श्राद्ध

Pitru Paksha shradh 2018:क्या करें और क्या नहीं

1. पितृपक्ष के दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना शुभ होता है. ऐसा जरूर करें.

2. पिंडदान ऐसे समय में करें, जब छाया पीछे की ओर हो. सुबह या अंधेरे में पिंडदान या श्राद्ध नहीं किया जाता.

3. इस बात का खास ख्याल रखें कि श्राद्ध करते वक्त लोहे के आसन पर नहीं बैठा जाता. अगर आप ब्राह्मणों से पिंडदान करा रहे हैं तो इस बात ध्यान रखें कि लोहे की बनी पीढ़ी या बैठकी पर बैठकर पंडित श्राद्ध ना कराएं.

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4. आमतौर पर केले के पत्ते पर भोजन करना और कराना शुभ माना जाता है. लेकिन श्राद्ध के दौरान श्राद्ध करने और कराने वाले व्यक्ति को केले के पत्ते पर भोजन नहीं करना चाहिए.

5. पिंडदान और श्राद्ध के कई नियम हैं, जिसमें एक जनेऊ धारण करने को लेकर भी है. अगर आप जनेऊ पहनते हैं तो पिंडदान के दौरान उसे बाएं की जगह दाएं कंधे पर रखें.

6. पिंडदान लोहे या स्टील के बर्तन में नहीं किया जाता. इसके लिए कांसे या तांबे या चांदी के बर्तन, प्लेट या पत्तल का प्रयोग करें.

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7. पिंडदान करते वक्त तुलसी जरूर रखें.

8. श्राद्ध करते वक्त आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए.

9. पिता का श्राद्ध बेटा या बहूू करते हैं, उनके पोते या पोतियां नहीं करतीं.

10. श्राद्ध के दौरान घर में कलह ना हो, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दौरान पुर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिवार के आसपास ही रहते हैं.

11. किसी और घर में श्राद्ध ना करें.

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