नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मकर संक्रांति के मौके पर आज दुनिया के संभवतः सबसे अमीर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे. इस मंदिर के तहखानों में करीब दो लाख करोड़ की संपत्ति है. भगवान विष्णु का यह मंदिर देश के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल है. मान्यता है कि सबसे पहले इस स्थान से विष्णु भगवान की प्रतिमा प्राप्त हुई थी जिसके बाद उसी स्थान पर इस मंदिर का निर्माण किया गया है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है. मंदिर में कई गुप्त तहखाने हैं जिसमें अकूत संपत्ति मौजूद है. जी हां हम बात कर रहे हैं केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभ स्वामी मंदिर की.

तिरुवनंतपुरम में स्थित इस मंदिर का नाम पद्मनाभ स्वामी मंदिर है. यह एक ऐतिहासिक मंदिर है. पद्मनाभ स्वामी मंदिर विष्णु-भक्तों की महत्वपूर्ण आराधना-स्थली है. मंदिर की संरचना में सुधार कार्य किए गए जाते रहे हैं. कहा जाता है कि 1733 ई. में इस मंदिर का पुनर्निर्माण त्रावनकोर के महाराजा मार्तड वर्मा ने करवाया था. पद्मनाभ स्वामी मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है. मान्यता है कि स्थान से विष्णु भगवान की प्रतिमा प्राप्त हुई थी जिसके बाद यहां इस मंदिर का निर्माण किया गया है. मंदिर के निर्माण की कोई वास्तवित तारीख नहीं है.

मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है जिसे देखने के लिए रोज हजारों भक्त आते हैं. इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं. मान्यता है कि तिरुवनंतपुरम नाम भगवान के ‘अनंत’ नामक नाग के नाम पर ही रखा गया है. यहां पर भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को ‘पद्मनाभ’ कहा जाता है और इस रूप में विराजित भगवान यहां पर पद्मनाभ स्वामी के नाम से विख्यात हैं. यह केरल की संस्कृति एवं साहित्य का अनूठा संगम है. इसके एक तरफ तो खूबसूरत समुद्र तट है और दूसरी ओर पश्चिमी घाट में पहाड़ियों का अद्भुत नैसर्गिक सौंदर्य, इन सभी अमूल्य प्राकृतिक निधियों के मध्य स्थित है पद्मनाभ स्वामी मंदिर. इसका स्थापत्य देखते ही बनता है. मंदिर के निर्माण में महीन कारीगरी का भी कमाल देखने योग्य है.

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मंदिर के पास है इतनी संपत्ति
मंदिर तथा इसकी सम्पत्ति के स्वामी भगवान पद्मनाभस्वामी ही हैं. बहुत दिनों तक यह मंदिर तथा इसकी सम्पत्तियों की देखरेख और सुरक्षा एक न्यास (ट्रस्ट) द्वारा की जाती रही, जिसके अध्यक्ष त्रावणकोर के राजपरिवार का कोई सदस्य होता था. किन्तु वर्तमान समय में सुप्रीम कोर्ट ने राजपरिवार को इस मंदिर के प्रबंधन की अध्यक्षता करने से रोक दिया है. जून 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने पुरातत्व विभाग तथा अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि मंदिर के गुप्त तहखानों को खोलें और उनमें रखी वस्तुओं का निरीक्षण करें. इन तहखानों में रखी करीब दो लाख करोड़ की संपत्ति का पता चला है. हालांकि अभी भी तहखाने-बी को नहीं खोला गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस तहखाने को खोलने पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया है कि ये संपत्ति मंदिर की है और मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए.

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