Pradosh Vrat 2019 का काफी महत्‍व है. इस दिन भगवान शिव का पूजन किया जाता है. वे अपने भक्‍तों के सभी तरह के कष्‍टों को हरते हैं.

शुक्र प्रदोष व्रत
अगर प्रदोष व्रत, शुक्रवार को होता है तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस बार प्रदोष व्रत 25 अक्‍टूबर, शुक्रवार को है.

महासंयोग
इस बार प्रदोष व्रत पर महासंयोग बन रहा है. शुक्र प्रदोष के दिन ही भगवान धनवंतरि की जयंती के दिन यानी धनतेरस है. शुक्र प्रदोष और धन त्रयोदशी का महासंयोग है. इस दिन ब्रह्म व सिद्धि योग बन रहा है. ऐसा महासंयोग 100 साल बाद बन रहा है.

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प्रदोष व्रत महत्‍व
प्रदोष व्रत को सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति देने वाला कहा गया है. ये व्रत भगवान शिव को समर्पित है. ये व्रत शुक्रवार को होता है तो और भी फलदायी माना जाता है. शुक्रवार को प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन में सुख समृद्धि भर देता है.

शुभ मुहूर्त
इस बार शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त 25 अक्‍टूबर, शुक्रवार को रात 7:08 से 8:36 बजे तक का है.

प्रदोष व्रत कथा
एक नगर में तीन मित्र रहते थे– राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र. राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे, धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकि गौना शेष था.

एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे. ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है.’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय कर लिया. तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं, ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता, लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया. ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो ज़िद पर अड़ा रहा और कन्या के माता पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी.

विदाई के बाद पति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई. दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे. कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकुओं से पड़ा. जो उनका धन लूटकर ले गए. दोनों घर पहूंचे. वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया. उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा.

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जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी. और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें. धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया जहां उसकी हालत ठीक होती गई. यानि शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए.

पूजा विधि
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें. नित्यकर्म से निवृत्त होकर महादेव का स्मरण करें. शुक्र प्रदोष व्रत का संकल्प लें. इस दिन शाम के समय शिव पूजा होगी. सूर्यास्त से एक घंटा पहले स्नान करें और उसके बाद श्वेत वस्त्र धारण करें.

घर में शिव आराधना आरंभ करें. सबसे पहले शिवलिंग को पंचामृत से स्नान करवाएं. शिव का शुद्ध जल से जलाभिषेक करें.

शिवपूजा करते समय ओम नम: शिवाय का जाप करें. जलाभिषेक के बाद शिव को चंदन, अबीर, गुलाल, कुमकुम, वस्त्र आदि समर्पित करें. बिलपत्र चढ़ाएं.

इसके बाद शिव को सफेद फूल अति प्रिय है इसलिए सफेद फूल समर्पित करें. आंकड़ा, भांग, धतूरा समर्पित करें. पंचामृत, मिठाई, ऋतुफल, सूखे मेवे का भोग लगाएं. प्रदोष की कथा का वाचन करें. पूजा होने के पश्चात आरती उतारें और प्रसाद बांटे.

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