Pradosh Vrat 2019 का शिव भक्‍तों के लिए काफी महत्‍व है. माह में दो बार आने वाले इस दिन पर खास तरीके से शिव पूजन किया जाता है और व्रत रखा जाता है.

Pradosh Vrat 2019 Date
प्रदोष व्रत 11 अक्‍टूबर, शुक्रवार को है.

शुक्र प्रदोष व्रत
जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है तो उसका खास महत्‍व होता है. इस दिन शिव पूजन करने से और प्रदोष व्रत करने से सौभाग्‍य की प्राप्ति होती है.

पूजन विधि
तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, दूध, अर्पित किए जाने वाले वस्त्र. चावल, अष्टगंध, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, धतूरा, अकुआ के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, पान और दक्षिणा एकत्रित कर लें.

मंडप में रंगों की सहायता से रंगोली बनानी चाहिए. पूजा करते समय साधक को कुश के आसन का इस्तेमाल करना चाहिए. उत्तर-पूर्व की दिशा में मुंह करके भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का पाठ करते हुए शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करना चाहिए. व्रत के दौरान कुछ भी नहीं खाना चाहिए.

Festivals in October 2019: अक्‍टूबर में दशहरा, करवाचौथ समेत ये हैं पर्व-त्‍योहार, देखें संपूर्ण पांचांग…

शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में पूजन का शुभ मुहूर्त 11 अक्‍टूबर, शुक्रवार शाम 6:15 बजे से रात 8:43 बजे तक का है.

शुक्र प्रदोष व्रत कथा
एक नगर में 3 मित्र रहते थे- राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र. राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे. धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना शेष था. एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे.

ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है.’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरंत ही उसने अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय कर लिया. तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं. ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया.

ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो जिद पर अड़ा रहा और कन्या के माता-पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी. विदाई के बाद पति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई. दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे.

कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकुओं से पड़ा. जो उनका धन लूटकर ले गए. दोनों घर पहूंचे. वहां धनिक पुत्र को सांप ने डंस लिया. उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो 3 दिन में मर जाएगा.

जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें. धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया, जहां उसकी हालत ठीक होती गई यानी शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए.

धर्म से जुड़ी अन्य खबरें पढ़ने के लिए धर्म पर क्लिक करें.