प्रदोष व्रत 2019: भगवान शिव को हम भोले भंडारी भी कहते हैं, क्‍योंकि शंकर भगवान बहुत भोले हैं और यदि कोई सच्‍ची श्रद्धा और प्रेमभाव से शिवलिंग पर सिर्फ एक लोटा जल भी चढ़ा दें तो वे खुश हो जाते हैं. ऐसे में अगर भगवान शिव की कोई विधिवत पूजा करें तो परिणाम और बेहतर होता है. शिव पूजा करने का दिन वैसे तो हर सोमवार का होता है लेकिन माह की त्रयोदशी तिथि के उपवास को ज्‍यादा महत्‍व दिया जाता है. जिसे सभी प्रदोष व्रत के रूप में जानते हैं. जो कि भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस व्रत को प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को रखा जाता है. फरवरी माह में प्रदोष व्रत 17 फरवरी को है.Also Read - Today’s Panchang, 04 September 2021: शनि त्रयोदशी/ प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त, पढ़ें पंचांग

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प्रदोष व्रत का महत्‍व

प्रदोष व्रत का सप्ताह के सातों दिन के प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व है. जो भी लोग अपना कल्याण चाहते हों यह व्रत रख सकते हैं. प्रदोष व्रत को करने से हर प्रकार के दोष मिट जाते हैं.

1. रविवार के दिन प्रदोष व्रत आप रखते हैं तो सदा निरोग रहेंगे.

2. सोमवार के दिन व्रत करने से आपकी इच्छा फलित होती है.

3. मंगलवार को प्रदोष व्रत रखने से रोग से मुक्ति मिलती है और आप स्वस्थ रहते हैं.

4. बुधवार के दिन इस व्रत का पालन करने से सभी प्रकार की कामना सिद्ध होती है.

5. बृहस्पतिवार के व्रत से शत्रु का नाश होता है.

6. शुक्रवार को प्रदोष व्रत से सौभाग्य की वृद्धि होती है.

7. शनिवार को प्रदोष व्रत से पुत्र की प्राप्ति होती है.

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प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

17 फरवरी 2019 रविवार 18:08 से 20:43

पूजन के लिए सामग्री

भोले की उपासना के लिए पूजन शुरू करने से पहले तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, दूध, अर्पित किए जाने वाले वस्त्र. चावल, अष्टगंध, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, धतूरा, अकुआ के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, पान और दक्षिणा एकत्रित कर लें.

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ऐसे करें व्रत

मंडप में रंगों की सहायता से रंगोली बनानी चाहिए.

पूजा करते समय साधक को कुश के आसन का इस्तेमाल करना चाहिए.

उत्तर-पूर्व की दिशा में मुंह करके भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.

‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का पाठ करते हुए शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करना चाहिए.

व्रत के दौरान कुछ भी नहीं खाना चाहिए.

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