Pradosh Vrat 2019 का काफी महत्‍व है. इस दिन भगवान शिव का पूजन करने से हर तरह के कष्‍ट दूर हो जाते हैं.

शनि प्रदोष व्रत
अगर प्रदोष व्रत, शनिवार को होता है तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस माह प्रदोष व्रत 9 नवंबर, शनिवार को है.

संयोग
प्रदोष व्रत शनिवार को है और इस दिन शनि त्रयोदिशी है. तुलसी विवाह भी है. इस कारण से इस व्रत का महत्‍व और बढ़ गया है. इस दिन व्रत रखने से शनिदेव से मिल रहे कष्‍ट दूर होते हैं.

प्रदोष व्रत महत्‍व
प्रदोष व्रत को सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति देने वाला कहा गया है. ये व्रत भगवान शिव को समर्पित है. वैसे तो हर मास की दोनों त्रयोदशी के व्रत पुण्य फलदायी माने जाते हैं, लेकिन भगवान शिव के भक्त शनिदेव के दिन त्रयोदशी का व्रत, समस्त दोषों से मुक्ति देने वाला माना जाता है. संतान प्राप्ति की कामना के लिये शनि त्रयोदशी का व्रत विशेष रूप से सौभाग्यशाली माना जाता है.

शुभ मुहूर्त
इस बार शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त 9 नवंबर, शनिवार को है. पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:58 से 8:32 बजे तक का है.

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Shani Pradosh Vrat Vidhi

प्रदोष व्रत करने के लिये त्रयोदशी के दिन प्रात: सूर्य उदय से पूर्व उठना चाहिए. नित्यकर्मों से निवृत होकर, भगवान शिव का स्मरण करें.

इस व्रत में आहार नहीं लिया जाता है और पूरे दिन उपावस रखने के बाद सूर्यास्त से एक घंटा पहले, स्नान आदि कर श्वेत वस्त्र धारण किये जाते है.

पूजन स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें. मंडप तैयार करें. इस मंडप में पद्म पुष्प की आकृति पांच रंगों का उपयोग करते हुए बनाई जाती है.

प्रदोष व्रत कि आराधना करने के लिये कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है. पूजन में भगवान शिव के मंत्र “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करें. पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें. प्रसाद का भोग लगाएं.

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