प्रदोष व्रत 2019: हिन्दू धर्म में व्रत और उपवास का बेहद ख़ास महत्व माना जाता है. फिर चाहे वो सप्ताह के दिनों का हो या महीने की तिथियां. वैसे तो माह की प्रत्येक तिथि में व्रत रखने का अपना ही महत्व होता है लेकिन इन सभी में सबसे महत्वपूर्ण और लाभकारी त्रयोदशी तिथि के उपवास को माना जाता है. जिसे सभी प्रदोष व्रत के रूप में जानते है. जो की भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस व्रत को प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को रखा जाता है.

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आज 18 जनवरी को शनि प्रदोष का व्रत करके भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने वाले की मनचाही मुराद पूरी होती है. ऐसी मान्‍यता है कि शनिवार के दिन प्रदोष का व्रत बहुत फलदायी होता है, विशेषकर उनके लिए जो कि संतान की चाह रखते हैं. भगवान शिव ऐसे लोगों की मन्‍नत जरूर पूरी करते हैं. मान्‍यता है क‍ि इस दिन की पूजा से शनिदेव भी खुश होते हैं.

व्रत का सही समय 

शनि प्रदोष व्रत 17:45 से 20:27

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व्रत और पूजा विधि

  • इस व्रत के दिन सुबह नहाने के बाद भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए.
  • पूजा में भगवान शिव-पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से नहलाएं और फिर बिल्व पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग और इलायची चढ़ाएं.
  • शाम को फिर से नहाकर इसी तरह शिवजी की पूजा करें. भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं. आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं.
  • इसके बाद शिवजी की आरती करें.

प्रदोष व्रत में रखना चाहिए इन बातों का ध्यान

  • प्रदोष व्रत बिना कुछ खाए रखा जाता है. ऐसा नहीं कर सके तो एक समय फल खा सकते हैं.
  • प्रदोष व्रत के दिन रात में जागरण करें और शिवजी के मंत्रों का जाप करें. इस तरह व्रत व पूजा करने से व्रती (व्रत करने वाला) की हर इच्छा पूरी हो सकती है.
  • प्रदोष व्रत के समय दिनभर पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए.
  • बूढ़े और रोगी लोग रात्रि जागरण न कर सके तो भी दोष नहीं लगता है.

प्रदोष व्रत से लाभ
रविवार के दिन प्रदोष व्रत आप रखते हैं तो सदा नीरोग रहेंगे.
सोमवार के दिन व्रत करने से आपकी इच्छा फलित होती है.
मंगलवार को प्रदोष व्रत रखने से रोग से मुक्ति मिलती है और आप स्वस्थ रहते हैं.
बुधवार के दिन इस व्रत का पालन करने से सभी प्रकार की कामना सिद्ध होती है.
बृहस्पतिवार के व्रत से शत्रु का नाश होता है.
शुक्रवार को प्रदोष व्रत से सौभाग्य की वृद्धि होती है.
शनिवार को प्रदोष व्रत से पुत्र की प्राप्ति होती है.

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