नई दिल्ली: 1 अगस्त यानी आज प्रदोष व्रत है. इसे शनि त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखे से शनि दोष दूर होने के साथ ही भगवान शिव की भी विशेष कृपा होती है. यह व्रत उन लोगों के लिए काफी लाभकारी होता है जिन पर शनि की साढ़ेसाती लगी होती है. शास्त्रों में भगवान शिव को शनि देव का गुरु और आराध्य बताया गया है. इस कारण सावन के महीने में शनि देव और भगवान शिव की पूजा से मनोकामना पूरी होती हैं. प्रदोष व्रत को भगवान शिव की साधना के लिए फलदायी बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत जब शनिवार को पड़ता है तब इसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं. प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है. यह व्रत प्रति माह में दो बार त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता हैAlso Read - Pradosh Vrat 2020: साल के आखिरी प्रदोष व्रत पर जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

इस दिन दान करें ये चीजें
शनि प्रदोष के दिन व्रत, पूजा, दान करने से सुख और सौभाग्य बढ़ता है. शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं. शनि प्रदोष के दिन जरूरतमंद लोगों को कपड़े और अन्न के साथ पादुका (जूते-चप्पल) का दान करने से जाने-अनजाने में हुए पाप समाप्त हो जाते हैं. इस दिन रुद्राभिषेक और शनिदेव का तेल से अभिषेक के बाद चांदी के नाग नागिन की पूजा करनी चाहिए. फिर उन्हें पवित्र नदी में बहा देना चाहिए. Also Read - Pradosh Vrat 2020 November: प्रदोष व्रत तिथि, महत्व, व्रत कथा, पूजन विधि, शुभ मुहूर्त

शनि प्रदोष व्रत मुहूर्त Also Read - Pradosh Vrat 2020: इस बार धनतेरस के साथ ही मनाया जाएगा प्रदोष व्रत, जानें इसका महत्‍व और पूजन विधि

श्रावण, शुक्ल त्रयोदशी
प्रारम्भ – 10:42 पी एम, जुलाई 31
समाप्त – 09: 54 पी एम, अगस्त 01

शनि प्रदोष व्रत का महत्व
माना जाता है कि शनि प्रदोष व्रत करने वाले जातकों को साढ़ेसाती और ढैय्या से छुटकारा मिलता है. इसके साथ ही उनकी कठिनाइयां भी दूर होती हैं. नौकरी, व्यवसाय में लाभ के साथ दीर्घायु और पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है.