Pradosh Vrat 2020: प्रदोष व्रत पर भगवान शिव का पूजन किया जाता है. इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

Pradosh Vrat 2020 Date
प्रदोष व्रत 22 जनवरी, बुधवार को है. बुधवार का दिवस होने के कारण इस व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है.

बुध प्रदोष का महत्‍व
बुध प्रदोष को सभी प्रकार की सफलता प्रदान करने वाला कहा गया है. बुध प्रदोष व्रत रखने से नौकरी में मनचाही सफलता मिलती है. प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है.

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बुध प्रदोष व्रत कथा
एक पुरुष का नव विवाह हुआ. विवाह के 2 दिवस पश्चात उसकी पत्‍नी मायके चली गई. कुछ दिनों के बाद वह पुरुष पत्‍नी को लेने उसके यहां गया. बुधवार को जब वह पत्‍नी के साथ लौटने लगा, तो ससुराल पक्ष ने उसे रोकने का प्रयत्‍न किया, कि विदाई हेतु बुधवार शुभ नहीं होता, परंतु वह नहीं माना व पत्‍नी के साथ चल पड़ा.

नगर के बाहर पहुंचने पर पत्‍नी को प्यास लगी. पुरुष लोटा लेकर जल की तलाश में चल पड़ा. पत्‍नी वृक्ष तले बैठ गई. कुछ देर बाद पुरुष जल लेकर वापस लौटा, तो उसने देखा, कि उसकी पत्‍नी किसी के साथ मुस्कुरा कर वार्ता कर रही है व उसके लोटे से जल पी रही है. उसको क्रोध आ गया. वह निकट पहुंचा, तो उसके आश्‍चर्य का ठिकाना न रहा. उस आदमी की सूरत उसी की भांति थी. पत्‍नी सोच में पड़ गई. दोनों पुरुष झगड़ने लगे. भीड़ इकट्ठी हो गई.

हमशक्ल आदमियों को देख सभी आश्‍चर्य में पड़ गए. उन्होंने स्त्री से पूछा, “उसका पति कौन है…?” वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई. वह पुरुष शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा, “हे भगवान! हमारी रक्षा करें. मुझसे भूल हुई.

जैसे ही उसकी प्रार्थना पूर्ण हुई, दूसरा पुरुष अन्तर्धान हो गया. पति-पत्‍नी सकुशल अपने घर पहुंच गए. उस दिवस के उपरांत पति-पत्‍नी नियमपूर्वक बुध त्रयोदशी प्रदोष व्रत रखने लगे.

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