Pradosh Vrat 2020 पर भगवान शिव के पूजन का विधान है. व्रत करके शाम के समय भगवान शिव की पूजा के समय व्रत कथा कही-सुनी जाती है.

प्रदोष व्रत में बुध प्रदोष का काफी महत्‍व है. इसलिए बुध प्रदोष कथा को ही कहने का विधान बताया गया है.

बुध प्रदोष व्रत कथा

प्राचीन काल की कथा है, एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ था. वह गौने के बाद दूसरी बार पत्नी को लाने के लिये ससुराल पहुंचा और उसने सास से कहा कि बुधवार के दिन ही पत्नी को लेकर अपने नगर जायेगा.

Pradosh Vrat 2020: साल का पहला बुध प्रदोष व्रत, तिथि, महत्‍व, पूजन विधि

उस पुरुष के सास-ससुर ने, साले-सालियों ने उसको समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले जाना शुभ नहीं है, लेकिन वह पुरुष नहीं माना. विवश होकर सास-ससुर को अपने जमाता और पुत्री को भारी मन से विदा करना पड़ा.

पति-पत्नी बैलगाड़ी में चले जा रहे थे. एक नगर से बाहर निकलते ही पत्नी को प्यास लगी. पति लोटा लेकर पत्नी के लिये पानी लेने गया. जब वह पानी लेकर लौटा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी पराये पुरुष के लाये लोटे से पानी पीकर, हँस-हँसकर बात कर रही है. वह पराया पुरुष बिल्कुल इसी पुरुष के शक्ल-सूरत जैसा था. यह देखकर वह पुरुष दूसरे अन्य पुरुष से क्रोध में आग-बबूला होकर लड़ाई करने लगा. धीरे-धीरे वहाँ काफी भीड़ इकट्ठा हो गयी.
इतने में एक सिपाही भी आ गया. सिपाही ने स्त्री से पूछा कि सच-सच बता तेरा पति इन दोनों में से कौन है? लेकिन वह स्त्री चुप रही क्योंकि दोनों पुरुष हमशक्ल थे.

बीच राह में पत्नी को इस तरह देखकर वह पुरुष मन ही मन शंकर भगवान की प्रार्थना करने लगा कि हे भगवान मुझे और मेरी पत्नी को इस मुसीबत से बचा लो, मैंने बुधवार के दिन अपनी पत्नी को विदा कराकर जो अपराध किया है उसके लिये मुझे क्षमा करो. भविष्य में मुझसे ऐसी गलती नहीं होगी.

श्री शंकर भगवान उस पुरुष की प्रार्थना से द्रवित हो गये और उसी क्षण वह अन्य पुरुष कही अंर्तध्‍यान हो गया. वह पुरुष अपनी पत्नी के साथ सकुशल अपने नगर को पहुँच गया. इसके बाद से दोनों पति-पत्नी नियमपूर्वक बुधवार प्रदोष व्रत करने लगे. बोलो उमापति शंकर भगवान की जय.

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