नई दिल्ली: आज आषाढ़ महीने का पहला प्रदोष व्रत है. इस व्रत में भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने से सौभाग्य बढ़ता है. दक्षिण भारत में प्रदोष व्रत को प्रदोषम के नाम से जाना जाता है और इस व्रत को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है. प्रदोष व्रत चन्द्र मास की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है जिसमे से एक शुक्ल पक्ष के समय और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है. कुछ लोग शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के प्रदोष के बीच फर्क बताते हैं. प्रदोष का दिन जब सोमवार को आता है तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं, मंगलवार को आने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं और जो प्रदोष शनिवार के दिन आता है उसे शनि प्रदोष कहते हैं. इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी दोष दूर हो जाते हैं और व्यक्ति का जीवन निर्मल हो जाता है.Also Read - Today’s Panchang, 04 September 2021: शनि त्रयोदशी/ प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त, पढ़ें पंचांग

प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
इस दिन त्रयोदशी की तिथि प्रातः काल 9 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 19 जून को दिन में 11 बजे समाप्त होगी. प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त संध्याकाल में 7 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर रात्रि में 9 बजकर 22 मिनट तक है. Also Read - Kab Hai Pradosh Vrat 2021: इस दिन मनाया जाएगा ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत, जानें किस शुभ मुहूर्त पर करें भगवान शिव की पूजा

प्रदोष व्रत पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा जल से स्नान कर शिव जी का स्मरण करना चाहिए. फिर स्वच्छ कपड़े धारण करने चाहिए. अब सबसे पहले भगवान सूर्य को जल का अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान शिव जी एवं माता पार्वती की पूजा शिव चालीसा का पाठ, मंत्रों का जाप कर फल, फूल, धूप, दीप, अक्षत, भांग, धतूरा, दूध,दही और पंचामृत से करें. अंत में आरती अर्चना कर भगवान शिव और माता पार्वती से अन्न, जल और धन की कामना करें. दिनभर उपवास रखें. शाम में आरती अर्चना करें. और व्रत खोलें. Also Read - Pradosh Vrat 2021 Date & Shubh Yog: इस बार प्रदोष व्रत पर बनने जा रहा है शुभ योग, जानें डेट, पूजा विधि और मुहूर्त