नई दिल्ली: दक्षिण भारत में प्रदोष व्रत को प्रदोषम के नाम से जाना जाता है और इस व्रत को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है. प्रदोष व्रत चन्द्र मास की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है जिसमे से एक शुक्ल पक्ष के समय और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है. कुछ लोग शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के प्रदोष के बीच फर्क बताते हैं. प्रदोष का दिन जब सोमवार को आता है तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं, मंगलवार को आने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं और जो प्रदोष शनिवार के दिन आता है उसे शनि प्रदोष कहते हैं.Also Read - Budh Pradosh Vrat 2021: बुध प्रदोष व्रत पर जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, इस प्रदोष का महत्व, कैसे करें महादेव का पूजन, भगवान शिव के इन मंत्रों का जप करें

हिंदू पंचांग के मुताबिक़, हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत पड़ता है. आज 2 जुलाई को प्रदोष व्रत है. प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस व्रत के दौरान मां पार्वती की भी अराधना की जाती है. मान्यताओं के मुताबिक, जो जातक प्रदोष व्रत रखता है भगवान शिव उसकी सभी प्रकार की परेशानियों का हरण कर लेते हैं. Also Read - Pradosh Vrat 2020: साल के आखिरी प्रदोष व्रत पर जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

पूजा का शुभ मुहूर्त- Also Read - Pradosh Vrat 2020 November: प्रदोष व्रत तिथि, महत्व, व्रत कथा, पूजन विधि, शुभ मुहूर्त

आषाढ़, शुक्ल त्रयोदशी
प्रारम्भ – 3 बजकर 13 मिनट से शुरू, जुलाई 02
समाप्त – 1 बजकर 16 मिनट , जुलाई 03

प्रदोष व्रत पूजा विधि-

इस दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव का अभिषेक करें. पंचामृत का पूजा में प्रयोग करें. धूप दिखाएं और भगवान शिव को भोग लगाएं. इसके बाद व्रत का संकल्प लें. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव त्रयोदशी तिथि में शाम के समय कैलाश पर्वत पर स्थित अपने रजत भवन में नृत्य करते हैं. इस दिन भगवान शिव प्रसन्न होते हैं.