Pradosh Vrat: हिन्दू धर्म में हर मास के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत का आयोजन किया जाता है. बता दें कि सूर्यास्त के बाद के समय से रात्रि प्रारंभ होने के ठीक पूर्व के समय को ही यूँ तो प्रदोष काल कहा जाता है. प्रदोष व्रत को प्रदोषम के नाम से जाना जाता है और इस व्रत को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है. इस बार सोम प्रदोष व्रत 23 दिसंबर, दिन सोमवार को पड़ रहा है.

प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को सभी विशेष व्रतों में से एक बताया गया है. जिसे रखने से शुभ फलदायक लाभों की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन सच्ची श्रद्धा भाव से उपवास रख, भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करता है, उन्हें समस्त बाधाओं और कष्टों से भगवान भोले मुक्ति दिलाते हैं और उन्हें मृत्यु के पश्चात मोक्ष की भी प्राप्ति होती है. सोमवार के दिन प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति की हर मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. इसे सोम प्रदोषम या चंद्र प्रदोषम के नाम से भी जाना जाता है.

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प्रदोष व्रत का पौराणिक महत्व
प्रदोष व्रत से मिलने वाले शुभ फलों के पीछे यूँ तो आपको कई पौराणिक कथाएँ सुनने को मिल जाएंगे जिनके अनुसार प्रदोष व्रत करने से दो गौ के दान जितना पुण्य प्राप्त होता है. ऐसे में इस व्रत को लेकर ये भी माना जाता है कि वेदों के महाज्ञानी सूतजी ने गंगा के तट पर शौनकादि ऋषियों से चर्चा करते हुए इस बात का उल्लेख किया था कि कलियुग अधर्म से भरा रहेगा, जिसके चलते धर्म और न्याय की राह छोड़ प्राणी अन्याय और अधर्म के मार्ग पर चल निकल जाएंगे और उसी समय प्रदोष व्रत ही उनके सभी पापों के प्रायश्चित का एक मात्र माध्यम साबित होगा.

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प्रदोष व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
प्रदोष व्रत के दिन विशेष तौर से सुबह और शाम दोनों समय ही भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जानती है. जिसमें से संध्या का समय व्रत पूजन के लिए बेहद शुभ एवं फलदायी माना जाता है. तभी इस तिथि पर सभी शिव मंदिरों में संध्या के समय प्रदोष मंत्र का जाप किया जाता है. ऐसे में प्रदोष व्रत को करने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिन्हे अपनाकर आप इस व्रत से शुभाशुभ परिणाम पा सकते है.

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पूजा विधि

  1. त्रयोदशी तिथि के दिन सर्वप्रथम सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  2. इसके बाद उगते हुए सूर्य देव के दर्शन करते हुए उन्हें जल अर्पित करें.
  3. इसके पश्चात किसी शिव मंदिर में भगवान शिव का बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि से पूरे विधि विधान के साथ पूजन कर व्रत का संकल्प लें.
  4. व्रत करने वाले लोगों को पूरे दिन भर किसी भी प्रकार का भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए.
  5. हालांकि अगर ऐसा मुमकिन न हो तो फलाहार किया जा सकता है.
  6. पूरे दिन व्रत करने के बाद सूर्यास्त से कुछ देर पहले पुनः स्नान कर सफेद वस्त्र पहनें.
  7. इसके बाद स्वच्छ जल अथवा गंगाजल से पूजा स्थल को शुद्ध करें.
  8. इसके बाद गाय के गोबर से एक मंडप तैयार करें.
  9. पूजा स्थल पर अलग-अलग रंगों से रंगोली बनाए.
  10. जब पूजा की सभी तैयारियाँ पूरी हो जाएं तो उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठ जाएं.
  11. इसके बाद “ओम नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप कर और शिवलिंग पर जल चढ़ाएं.
  12. फिर भगवान शिव की पूजा करते हुए शिव आरती और शिव चालीसा का पाठ करें.

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