Pradosh Vrat 2019: शिव उपासकों के लिए प्रदोष व्रत का खास महत्‍व है. इस माह प्रदोष व्रत 17 अप्रैल, बुधवार को पड़ रहा है. बुधवार होने के कारण इस दिन बुध प्रदोष योग बन रहा है. इस दिन शिव-पार्वती पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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प्रदोष व्रत का महत्‍व
शिव पूजा करने का दिन वैसे तो हर सोमवार का होता है लेकिन माह की त्रयोदशी तिथि के उपवास को ज्‍यादा महत्‍व दिया जाता है. जिसे सभी प्रदोष व्रत के रूप में जानते हैं. जो कि भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस व्रत को प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को रखा जाता है.

व्रत विधि
सूर्य उदय से पहले उठें और स्नान कर लें. इसके बाद पूजा घर में भगवान शंकर के सामने आसन लगाकर बैठे और व्रत का संकल्प लें. इस व्रत में भोजन नहीं करते. इसलिए शाम तक कुछ नहीं खा सकते. शाम को सूर्यास्त से एक घंटे पहले स्नान करें और श्वेत और साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद पूजा घर की साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर पूरे घर को शुद्ध करें.

अगर पूजा घर मिट्टी का कमरा है तो उसे पहले गाय के गोबर से लीप लें. मंडप तैयार करें और उसमें पांच रंगों से रंगोली बनाएं. प्रदोष व्रत कि आराधना करने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है. इस प्रकार पूजन की तैयारियां करके उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर का पूजन करना चाहिए. पूजन में भगवान शिव के मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करते हुए शिव को जल चढ़ाना चाहिए.

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