नई दिल्ली. सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा और उनके प्रसाद की बड़ी महिमा है. अक्सर लोगों की इच्छा होती है कि घर बैठे ही उन्हें बाबा भोलेनाथ का प्रसाद मिल सके. ऐसे में डाक विभाग ने इस बात के प्रबन्ध किए हैं कि देश के किसी भी कोने में बैठे शिवभक्त दो प्रमुख ज्योतिर्लिंगों- काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस और महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन- का प्रसाद घर बैठे स्पीड पोस्ट द्वारा ग्रहण कर सकें. लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के बीच चल रहे एक करार के तहत काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रसाद स्पीड पोस्ट द्वारा लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके तहत 62 रुपए का ई-मनीऑर्डर प्रवर डाक अधीक्षक, वाराणसी (पूर्वी), उत्तर प्रदेश के नाम भेजना होता है और बदले में वहां से काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सौजन्य से मंदिर की भभूति, रूद्राक्ष, भगवान शिव की लेमिनेटेड फोटो और शिव चालीसा प्रेषक के पास प्रसाद रूप में भेज दिया जाता है. Also Read - श्वेता सिंह कीर्ति ने दिखाया भगवान शंकर का रौद्र रूप, न्याय तो अब मिलकर रहेगा?

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कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का प्रसाद भी डाक द्वारा मंगाया जा सकता है. इसके लिए मैनेजर, स्पीड पोस्ट सेंटर, उज्जैन को 251 रुपए का ई-मनीऑर्डर करना पड़ेगा और इसके बदले में वहां से स्पीड पोस्ट द्वारा प्रसाद भेज दिया जाता है. इस प्रसाद में 200 ग्राम लड्डू, भभूति और भगवान श्री महाकालेश्वर जी का चित्र शामिल है. उन्होंने बताया कि इस प्रसाद को प्रेषक के पास एक वाटर प्रूफ लिफाफे में स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाता है, ताकि पारगमन में यह सुरक्षित और शुद्ध बना रहे. उन्होंने कहा कि भगवान शिव के इन सर्वप्रमुख ज्योतिर्लिंग के दर्शन की कामना समस्त विश्व में भक्तों की होती है, लेकिन सभी के लिए यहां पहुंचकर भगवत आराधना करना संभव नहीं हो पाता. इसी बात को ध्यान में रखते हुए डाक विभाग के माध्यम से भक्तों को शिव का सान्निध्य प्रदान करने की व्यवस्था की गई है. Also Read - महादेव की भक्ति में तल्लीन हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, किया दुग्धाभिषेक, जानें क्या है वजह

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सावन के महीने के हर सोमवार का है खास महत्व, आइए जानें

सावन में भगवान शंकर की आराधना से मिलता है पुण्य

मान्यता है कि सावन का महीना देवाधिदेव भगवान शंकर को अति प्रिय है. इसलिए इस महीने में शिव-भक्त अपने आराध्यदेव के दर्शन के लिए दूर-दूर से मंदिरों में पहुंचते हैं. सावन के महीने में श्रद्धालु उत्तराखंड के हरिद्वार से गंगा जल लेकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों के शिव मंदिरों में भगवान को अर्पित करते हैं. इस पावन महीने में झारखंड के देवघर में सालाना श्रावणी मेला लगता है. इस मेले में आने वाले श्रद्धालु अपने आराध्य देव का जलाभिषेक करने के लिए बिहार के सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम से गंगा जल लाकर भगवान शंकर को अर्पित करते हैं. सुल्तानगंज से देवघर तक की लगभग 100 किलोमीटर की इस यात्रा को शिव-भक्त पैदल ही पूरा करते हैं. देश के अन्य राज्यों में भी सावन के महीने के दौरान भगवान शंकर की विशेष पूजा-अर्चना करने की मान्यता है.

(इनपुट – एजेंसी)

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