Premanand Ji Maharaj Pravachan About Past Life Pichle Janam Ke Karmo Ka Fal Kya Hume Is Janam Mein Milta Hai
Premanand Maharaj: क्या इस जन्म में मिलता है पिछले जन्मों के कर्मों का फल? जानें क्या बोले प्रेमानंद महाराज
Premanand Maharaj On Past Life: पूर्व जन्म और कर्मफल को लेकर लोगों के मन में कई सारे सवाल हैं, ऐसे में प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में भक्तों को इसका सरल और संदुर जवाब दिया है.
Premanand Maharaj On Past Life: वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचन से लोगों के मन में जो सवाल चल रहे हैं उसका जवाब देते हैं और भक्तों के हर समस्या का समाधान निकालते हैं. इसी बीच में पूर्व जन्म और कर्मफल को लेकर लोगों के मन में हमेशा सवाल उठते रहते हैं. वहीं अब हाल ही में महाराज जी ने अपने एक प्रवचन में इसी विषय पर खुलकर बात की है और अपनी बातों से भक्तों की बातों का जवाब दिया है.
बहुत पुराना दंड भी व्यक्ति को भोगना पड़ता है
असल में हाल ही में प्रवचन के दौरान एक महिला ने प्रेमानंद महाराज से सवाल किया कि पिछले जन्म के कर्मों का फल हमें इस जन्म में क्यों प्राप्त होता है? इस सवाल का जवाब प्रेमानंद महाराज ने दिया. इस सवाल का जवाब देते हुए महराज जी ने कहा कि किसी को मार डालोगे तो क्या फांसी की सजा तुरंत हो जाएगी. पांच-दस साल तक केस चलता है. इसी तरह भगवान की बहुत बड़ी न्यायाल है, जहां वो समस्त ब्रह्मांड का न्याय करते हैं. 100-100 जन्म का पूराना पाप क्यों न हो वो भी व्यक्ति को भोगना अवश्य ही पड़ता है. ऐसे में बहुत पुराना दंड भी व्यक्ति को भोगना पड़ता है.
हिसाब बिल्कुल पक्का होता है
महाराज के इसके बाद आगे कहा कि अनुसार, ‘भगवान की अदालत का रजिस्टर देर से खुलता जरूर है, लेकिन जब खुलता है तो हिसाब बिल्कुल पक्का होता है.’ इसके साथ ही महाराज जी ने लोगों को समझाया कि कभी भीबुरे कर्म न करें, क्योंकि उनका फल देर-सबेर जरूर मिलेगा. ऐसे में मैं चाहता हूं आप सभी लोग आग्रह है कि अच्छे कर्म करें औऱ सत्य के मार्ग पर चलें और नियमित रूप से नाम जप करें.
हम समझते हैं कि अब तो पाप भूल गया होगा, लेकिन ऐसा होता नहीं
महाराज जी ने ये भी कहा कि ‘हम समझते हैं कि अब तो पाप भूल गया होगा, लेकिन भगवान कभी नहीं भूलते. वे बस उचित समय का इंतज़ार करते हैं.’ इसके साथ ही उनके अनुसार कर्म का नियम ऐसा है कि उससे बचा नहीं जा सकता है. दुनिया में तो कभी-कभी अन्याय भी हो जाता है, पर भगवान के दरबार में नहीं. भगवान का स्मरण न केवल व्यक्ति का आंतरिक शुद्धिकरण करता है, बल्कि कर्मों की गांठों को खोलने में भी सहायक होता है. बता दें कि बड़ी संख्या में भक्त प्रेमानंद महाराज को सुनते हैं और उनकी दी गई सीख को जीवन में उताररते हैं.
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