Premanand Ji Maharaj Satsang Pooja Path Nahi Karte To Bhagwan Ki Kripa Kaise Hogi Ekantik Vartalaap
Premanand Maharaj: आलसी हूं...पूजा नहीं करती, कैसे होगा मेरा भला? महिला के सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने दिया चौंकाने वाला जवाब
Ekantik Vartalaap: प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि अधिक सोचने वाला ही डिप्रेशन में पहुंचता है. इस लिए लगातार नाम-जप करिए और मन को सोचने का समय ही मत दीजिए .
Premanand Ji Maharaj Ekantik Vartalaap: एकांतिक वार्तालाप के दौरान संत प्रेमानंद महाराज से एक महिला ने कहा कि वह बैंक में काम करती हैं. अपना काम पूरी इमानदारी से करती हैं. आगे महिला ने कहा कि वह आलसी हैं और काम के बाद पूजा-पाठ नहीं कर पातीं. ऐसे में उनके जीवन की भला कैसे होगा? आइये जानते हैं कि इस सवाल का प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया.
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आप निश्चिंत रहिए. केवल नाम-जप से ही उद्धार हो जाएगा. खूब नाम-जप करिए इससे सारी पूजा और सारे तीर्थों का फल मिल जाएगा. केवल नाम जप से ही सारे शास्त्रों के अध्ययन का फल मिल जाएगा. सब यज्ञों का फल मिल जाएगा और सारे पुण्यों का फल मिल जाएगा.
एकांतिक वार्तालाप के दौरान ही एक अन्य महिला ने पूछा कि जरूरत से ज्यादा सोचना कैसे बंद करें. प्रेमनंद महाराज ने नाम-जप को ही इसका उपाय भी बताया. प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि अधिक सोचने वाला ही डिप्रेशन में पहुंचता है. इस लिए लगातार नाम-जप करिए और मन को सोचने का समय ही मत दीजिए .
नेगेटिव थिंकिग और ओवर थिंकिंग को नाम-जप के द्वारा ही रोका जा सकता है. जब हमारे पाप नष्ट हो जाएंगे तो मन पाप, निर्मल और स्थिर हो जाता है. जैसे-जैसे पाप बढ़ते हैं वैसे-वैसे मन चंचल अशांत और खिन्न रहता है. हमें नाम-जप के द्वारा अपने पापों का नाश करना है. नाम-जप के द्वारा ओवर थिंकिंग को रोकना है और नाम-जप के द्वारा ही नकारात्मक विचारों से दूर रहकर आनंदित रहना है.
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प्रेमानंद महाराज ने कहा कि नाम-जप हर मर्ज की दवा है. उन्होंने कहा कि आपको जो नाम प्रिय हो उसे ही पकड़ लो. जब भी मन उल्टा-सीधा सोचना शुरू करे आप नाम-जप करना शुरू कर दो. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आप ऐसा कर के देख लो क्योंकि इसमें पैसा तो लगता नहीं है.
एक अन्य श्रद्धालु ने पूछा कि सूक्ष्म अहंकार पर कैसे विजय प्राप्त कर सकते हैं. सबको भगवत भाव से प्रणाम करने से अहंकार समाप्त हो जाता है. जब हम अपने को तिनके से भी नीचा मानेंगे तो अहंकार की भावना समाप्त हो जाएगी. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि हम सेवक हैं और भगवान स्वामी ये मानकर नाम-जप करें. दूसरा उपाय बताते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अपने गुरू को परम ब्रह्म मानते हुए उनकी आज्ञा के अनुसार साधना करने से भी अहंकार नष्ट हो जाएगा.
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