Ekantik Vartalaap: संत प्रेमानंद महाराज के एकांतिक वार्तालाप में दूर-दूर से लोग शामिल होने के लिए आते हैं और अपने सवाल पूछते हैं. ऐसे ही एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि पहले भक्तों के साथ राक्षसों के लिए भी दिव्य आकाशवाणी होती थी पर अब आकाशवाणी क्यों नहीं होती?
इस सवाल के जवाब में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आप सही कह रहे हैं. ये युग धर्म का प्रभाव है. कलियुग में बड़ी मलिनता है. आप राक्षसों का चरित्र देखेंगे तो पाएंगे कि राक्षस होकर भी इन लोगों ने हजारों साल तपस्या की. पहले वातावरण पवित्र था तो राक्षस भी बड़ी पवित्रता से तप करते थे. पहले राक्षस भी पूजा-पाठ करते थे लेकिन कलियुग में तो जो तपस्वी कुलों में पैदा हुए वो भी राक्षसी व्यवहार कर रहे हैं.

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि कलियुग में आम लोग भी मांस-मदिरा का सेवन धड़ल्ले से कर रहे हैं. इससे चरित्र का नाश हुआ है. दिव्य वाणी को सुन पाने के लिए दिव्य इंद्रियां भी तो होनी चाहिए. दिव्य नेत्र नहीं होंगे तो दिव्य दर्शन भी नहीं हो पाएगा.
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आज जो गुण बड़े-बड़े योगियों में भी नहीं होता. वो पिछले युगों में राक्षसों में होता था. राक्षस तप की शक्ति से कई रूप धर सकते थे. प्रेमानंद महाराज ने राक्षस हिरण्यकश्यप का उदाहरण दिया और कहा कि उसने कई साल तक घनघोर तप किया. सारे शरीर का मांस गल गया. केवल हड्डियां बचीं तब भी ब्रह्मदेव की साधना करता रहा. उसके तप के कारण ब्रह्मा जी को उसे वरदान देना पड़ा.
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आप ये नहीं सुनते होंगे कि किसी को भ्रष्ट करने के लिए स्वर्ग से अप्सरा आई. आज मानुषिक माया से ही नहीं बच पाता कोई तो आसुरी माया और दैवीय माया की क्या जरूरत है. बहुत सी बातें हैं जो युग धर्म में ढक जाती हैं.

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि युग धर्म के प्रभाव के कारण ही नदियां विलुप्त हो रही हैं. दिव्य फल देने वाले बड़े-बड़े वृक्ष विलुप्त हो रहे हैं. आज गंगा और यमुना के जल से आचमन करने में भी सकुचाते हैं लोग. ये युग धर्म का ही प्रभाव है कि आज से 25-30 साल पहले वृंदावन में जगह-जगह प्याऊ लगे होते थे. लोग श्रद्धा से पानी पिलाते थे. लेकिन आज परिक्रमा के बाद प्यास लगी तो आप पैसे देकर पानी खरीदो.
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि कलियुग की उम्र 4 लाख 32 हजार साल है और अभी तो केवल 6000 साल हुए. फिर भी हालत देखिए कि कुछ ऐसे मामले भी सामने आते हैं कि अपने घर में भी बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जब चरम पर होगा तब पाप और दुराचरण आज से लाखों गुना ज्यादा हो जाएगा.
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