Premanand Maharaj: सतयुग और त्रेतायुग से बेहतर है कलियुग! प्रेमानंद महाराज की ये बात सुनकर चौंक गए लोग

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि यदि आज भी आप अच्छे व्यवहार करने वाले और भगवान का भजन करने वाले हैं तो आप सतयुग में ही जी रहे हैं.

Published date india.com Published: December 14, 2025 2:47 PM IST
Premanand Maharaj: सतयुग और त्रेतायुग से बेहतर है कलियुग! प्रेमानंद महाराज की ये बात सुनकर चौंक गए लोग

Ekantik Vartalaap: एकांतिक वार्तालाप के दौरान प्रेमानंद महाराज से एक व्यक्ति ने पूछा कि इस कलियुग में हमेशा माया क्यों जीत जाती है. इस सवाल को जो जवाब संत प्रेमानंद महाराज ने दिया उसे सुनकर सभी लोग चौंक गए. प्रेमानंद महाराज ने पूछा कि माया किस युग में नहीं जीत रही थी? उन्होंने कह कि हर युग में माया का प्रभाव रहता है.

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि कलियुग में जो कार्य दस घंटे नाम जप करने से हो जाता है वह अन्य युगों में 10-10 हजार वर्ष हाथ उठाकर, एक पैर पर खड़े होकर कठोर तपस्या करने से भी नहीं होता था. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि कलियुग जैसा कोई महान युग नहीं है लेकिन अगर गलत आचरण और गंदे व्यवहार करोगे तो दुर्गति को होगी ही.

प्रेमानंद महाराज ने अपने शरीर, कपड़े और सामने लगे माइक को दिखा कर कहा कि ये सब माया ही हैं. उन्होंने कहा कि ये सब काम में आ रहे हैं. माया का सदुपयोग हो रहा है. मोबाइल भी माया ही है, उसका सदुपयोग हुआ तो आप यहां आकर बैठे हैं. जो दुरुपयोग करते हैं वो गंदे आचरण में लग जाते हैं. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि माया का दुरुपयोग ही कलियुग है और सदुपयोग ही सतयुग है.

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि यदि आज भी आप अच्छे व्यवहार करने वाले और भगवान का भजन करने वाले हैं तो आप सतयुग में ही जी रहे हैं. बुरा आचरण करने वाले हर युग में रहे हैं.

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प्रेमानंद महाराज ने इस दौरान एक चौंकाने वाली बात कही. उन्होंने कहा कि त्रेतायुग में जंगल से जाते हुए भगवान राम ने मुनियों से पूछा कि ये ढेर किस चीज का है. मुनियों ने बताया कि ये दंडकारण्य के उन उन तपस्वियों की हड्डियों का ढेर हैं जिन्हें राक्षसों ने खाकर फेंक दिया. ये सुनकर भगराम ने भुजा उठाकर प्रण किया पूरी धरती को राक्षसों से मुक्त कर दूंगा.

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि त्रेता में इतनी राक्षसी बुद्धि बढ़ी थी कि ऋषियों का भी खा लिया जाता था. कलियुग में खाते तो नहीं है. इसके बाद प्रेमानंद महाराज ने कहा कि कलियुग के समान महान युग भी नहीं है अगर अच्छे आचरण किए जाएं. बुरा आचरण करने पर नाश तो हर युग में हो जाता है.

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