मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी राजे भोसले की माता जीजाबाई का जन्म सिंदखेड़ नामक गाँव में हुआ था. यह स्थान वर्तमान में महाराष्ट्र के विदर्भ प्रांत में बुलढाणा जिले के मेहकर जनपद के अन्तर्गत आता है. उनके पिता का नाम लखुजी जाधव तथा माता का नाम महालसाबाई था. वीर माता जीजाबाई छत्रपति शिवाजी की माता होने के साथ-साथ उनकी मित्र, मार्गदर्शक और प्रेरणास्त्रोत भी थीं. उनका सारा जीवन साहस और त्याग से भरा हुआ था. उन्होने जीवन भर कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों को झेलते हुए भी धैर्य नहीं खोया और अपने ‘पुत्र ‘शिवा’ को वे संस्कार दिए, जिनके कारण वह आगे चलकर हिंदू समाज का संरक्षक ‘छात्रपति शिवाजी महाराज’ बना. जीजाबाई यादव उच्चकुल में उत्पन्न असाधारण प्रतिभाशाली थी. जीजाबाई यादव वंश की थी और उनके पिता एक शक्तिशाली सामन्त थे. शिवाजी महाराज के चरित्र पर माता-पिता का बहुत प्रभाव पड़ा. बचपन से ही वे उस युग के वातावरण और घटनाओँ को भली प्रकार समझने लगे थे.

शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 12 दिन बाद 17 जून 1674 के दिन रायगढ़ के पचड़ गांव में जीजामाता (Rajmata Jijabai Punyatithi 2021) ने अंतिम सांस ली. ऐसा लग रहा था कि मानों मौत भी छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक की प्रतीक्षा कर रहा हो. उनकी मृत्यु शिवाजी के लिए तो अपूरणीय क्षति ही थी. मराठों को भी इसका गहरा आघात लगा था. क्योंकि जीजामाता जनता का बहुत ध्यान रखती थीं.

जिनके संरक्षण में शिवाजी महाराज ने,
मराठों की गौरवशाली गाथा लिखी,
वो कोई और नहीं राजमाता जीजाबाई हैं…
राजमाता जीजाबाई को नमन!

छत्रपति शिवाजी महाराज की जननी,
राजमाता जीजाबाई का सारा जीवन,
साहस और त्याग से परिपूर्ण रहा,
इस वीरांगना को कोटि-कोटि नमन.
राजमाता जीजाबाई को नमन!

मराठा साम्राज्य के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज की,
जन्मदात्री राजमाता जीजाबाई की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि.
राजमाता जीजाबाई को नमन!

छत्रपति शिवाजी महाराज की जननी,
राजमाता जीजाबाई का सारा जीवन,
साहस और त्याग से परिपूर्ण रहा,
इस वीरांगना को कोटि-कोटि नमन.
राजमाता जीजाबाई को नमन!

अपने पुत्र को देशभक्त और वीर योद्धा बनाया,
शिवाजी को धर्म और देश के मान की रक्षा के लिए प्रेरित किया,
हिंदवी स्वराज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया,
उस महान वीरांगना की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन.
राजमाता जीजाबाई को नमन