
Shantanoo Mishra
नमस्कार, मैं शांतनू मिश्र, India.Com हिंदी में सब एडिटर के पद कार्यरत हूं. मेरे पास डिजिटल मीडिया में लगभग 04 वर्षों का अनुभव है. इससे पहले, मैं दैनिक जागरण (डिजिटल), ... और पढ़ें
Ram Mandir Pran Pratishtha: सनातन धर्म में विभिन्न प्रकार के पूजा व अनुष्ठानों को किया जाता है, जिसमें से एक प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान भी एक है. बता दें कि 22 जनवरी (Ram lala Pran Pratishtha) को अयोध्या में भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. इसके लिए अब कुछ ही घंटे विशेष है. शास्त्रों में प्राण प्रतिष्ठा के लिए विशेष नियम और विधि का उल्लेख किया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा स्थल पर देव प्रतिमा को स्थापित कर उनकी प्राण प्रतिष्ठा करने से विग्रह में स्वयं भगवान निवास करते हैं और सड़क की प्रार्थना सुनते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा क्यों और कैसे की जाती है? आइए जानते हैं, प्राण प्रतिष्ठा की विधि मंत्र और इस अनुष्ठान का महत्व?
जिस तरह अयोध्या राम जन्मभूमि में रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. ठीक उसी प्रकार किसी भी देवस्थल में भगवान की मूर्ति को स्थापित करने के साथ उनकी प्राण प्रतिष्ठा जरूर की जाती है. सनातन धर्म में इसे आवश्यक माना जाता है. बता दें की प्राण प्रतिष्ठा करने से देव प्रतिमा में स्वयं भगवान निवास करते हैं और उनके आवाहन के लिए विधिपूर्वक अनुष्ठान किए जाते हैं.
सनातन धर्म में यह भी मान्यता है कि प्राण प्रतिष्ठा से पहले देव प्रतिमा केवल एक पत्थर की प्रतिमा होती है. जब विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा की जाती है, उसके बाद ही भगवान के विग्रह की उपासना की जाती है और देवताओं तक हमारी प्रार्थना पहुंचती है. इसलिए गणेश उत्सव के 10 दिनों के दौरान भी घर में गणेश जी को स्थापित करने से पहले उनकी प्राण प्रतिष्ठा जरूर की जाती है.
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प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के दौरान देव प्रतिमा को कम से कम पांच पवित्र नदियों के जल से स्नान कराया जाता है. ऐसा यदि संभव नहीं हो तो गंगाजल को भी इस कार्य के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इसके बाद भगवान को सुंदर वस्त्र धारण कराया जाता है और फिर निर्धारित स्थान पर प्रतिमा को विराजमान किया जाता है. इसके बाद भगवान के विग्रह को चंदन, पुष्प व श्रृंगार अर्पित किए जाते हैं और मंत्र उच्चारण के साथ विधि-विधान से भगवान की पूजा की जाती है. अंत में भगवान की आरती के साथ अनुष्ठान को पूरा किया जाता है.
मानो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं
तनोत्वरिष्टं यज्ञSसमिमं दधातु विश्वेदेवास इह मदयन्ता मोम्प्रतिष्ठ ..
अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणाः क्षरन्तु च अस्यै
देवत्व मर्चायै माम् हेति च कश्चन ..
ॐ श्रीमन्महागणाधिपतये नमः सुप्रतिष्ठितो भव
प्रसन्नो भव, वरदा भव ..
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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