राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग सुगम हो गया है. प्रस्तावित राम मंदिर 128 फीट ऊंचा होगा और इसकी चौड़ाई 140 फीट जबकि लंबाई 270 फीट होगी. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में शनिवार को विवादित 2.77 एकड़ जमीन का मालिकाना हक हिंदुओं को प्रदान किया और मुस्लिमों को किसी अन्य जगह पांच एकड़ जमीन मुहैया करवाने का आदेश दिया.

इस फैसले के बाद अब क्या होगा? राम मंदिर निर्माण का कार्य कब शुरू होगा? मंदिर बनने में कितना समय लगेगा और मंदिर कैसा हुआ? ये कुछ अहम सवाल हैं.

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की मदद से राम जन्मभूमि न्यास शीघ्र राम मंदिर निर्माण शुरू करना चाहता है.

राम मंदिर निर्माण की अपनी परिकल्पना में विहिप ने हालांकि वर्षो से इसके लिए अनेक नक्शों पर विचार किया, लेकिन अंतिम रूप से एक नक्शा तैयार किया गया जोकि सबसे ज्यादा मान्य है और अनेक लोग इसे राम मंदिर के मूल स्वरूप की प्रतिकृति मानते हैं.

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए हालांकि द्वार और स्तंभों की नक्काशी वर्षों से हो रही है, लेकिन पवित्र गर्भगृह का निर्माण करने की आवश्यकता है, जहां भगवान रामलला विराजमान होंगे और उनकी पूजा की जाएगी. बताया जाता है कि स्तंभ तैयार हैं लेकिन गर्भगृह की तैयारी अभी नहीं हुई है.

भव्य राम मंदिर में 212 स्तंभों की आवश्यकता होगी, जिनमें से 106 स्तंभ बनकर तैयार हो चुके हैं और 106 स्तंभों की नक्काशी अभी होनी है. दो मंजिला मंदिर में ये स्तंभ लगाए जाएंगे. स्वीकृत डिजाइन के अनुसार, छत में शिखर होगा, जो इसे भव्य राम मंदिर का स्वरूप प्रदान करेगा.

प्रस्तावित राम मंदिर 128 फीट ऊंचा होगा और इसकी चौड़ाई 140 फीट जबकि लंबाई 270 फीट होगी. इस भव्य मंदिर में खास बात यह है कि इसमें इस्पात का उपयोग नहीं किया जाएगा.

राम मंदिर में पांच प्रवेशद्वार होंगे: सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंग मंडप, पूजा-गृह, और गर्भगृह हैं. रामलला की मूर्ति भूतल पर ही विराजमान होगी.

पूरे मंदिर के निर्माण में करीब 1.75 लाख घन फुट पत्थर की आवश्यकता होगी. पत्थर तराशी का काम 1990 में ही शुरू हो चुका था, इसलिए इसमें बहुत सारा काम पहले ही हो चुका है, फिर भी काफी कुछ करना बाकी है. सूत्र बताते हैं कि मंदिर निर्माण का कार्य आसान नहीं है और इसे पूरा करने में कम से कम चार साल लगेंगे.

विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, “मैं आपको यह नहीं बता सकता कि काम (मंदिर निर्माण) कब पूरा हो जाएगा. लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य यथाशीघ्र शुरू हो जाएगा.”

निर्माण में समय लगने का एक मुख्य कारण कार्यशाला तक की पहुंच है. सड़कें ठीक नहीं हैं इसलिए पत्थरों की आपूर्ति की रफ्तार सुस्त है. इसके अलावा, हस्तशिल्प नक्काशी में समय लगता है. हालांकि भूतल के लिए जितनी नक्काशी की आवश्यकता है वह पूरी हो चुकी है.

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