राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले क्यों इतने मंदिरों में प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं दर्शन? जानिए इसके पीछे छिपा आध्यात्मिक कारण

Ram Mandir Pran Pratishtha: अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा (Ram Lala Pran Pratishtha) के लिए यजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) रहेंगे. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी दक्षिण के विभिन्न मंदिरों के दर्शन कर रहे हैं. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे छिपा आध्यात्मिक महत्व?

Published date india.com Updated: January 21, 2024 10:14 AM IST
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले क्यों इतने मंदिरों में प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं दर्शन? जानिए इसके पीछे छिपा आध्यात्मिक कारण

Ram Mandir Pran Pratishtha Latest News: 22 जनवरी, सोमवार के दिन अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा (Ram Lala Pran Pratishtha) वैदिक विधि-विधान से की जाएगी. इस दौरान मुख्य यजमान के रूप में पूजा स्थल पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) उपस्थित रहेंगे. लेकिन प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान से पहले प्रधानमंत्री तमिलनाडु सहित दक्षिण के विभिन्न मंदिरों का दौरा कर रहे हैं. इस बीच 20 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने रामेश्वरम के श्री अरुलमिगु रामनाथस्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की और रामेश्वरम की पवित्र जल में स्नान किया. इससे पहले त्रिची के श्री रंगनाथस्वामी मंदिर में भी प्रधानमंत्री ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की.

दर्शन के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने रंगनाथ स्वामी मंदिर में एक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने विद्वानों के द्वारा किए गए रामायण के छंदों का पाठ सुना. इसके साथ आज यानी 21 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी धनुषकोडी में स्थित कोठंडारामस्वामी मंदिर में भी पूजा-अर्चना करेंगे. साथ ही वह अरिचल मुनाई पॉइंट भी जाएंगे, जहां राम सेतु के निर्माण का दावा किया जाता है. बता दें कि प्रधानमंत्री ने चित्रकूट में स्थित कालाराम मंदिर से विभिन्न देव स्थलों के दौरे को प्रारंभ किया था.

प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के लिए प्रधानमंत्री कर रहे हैं कठोर यम नियम का पालन

प्राण प्रतिष्ठा में यजमान के रूप में सम्मिलित होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी 11 दिनों तक कठोर नियमों का पालन कर रहे हैं. इस दौरान वह यम नियम का पालन कर रहे हैं, जिसमें अन्न त्याग, ब्रह्म मुहूर्त में पूजा-पाठ, जमीन पर शयन, प्रतिदिन गौ सेवा, देवस्थल जाकर पूजा-अर्चना और पवित्र स्नान आदि शामिल है. जिसका पालन प्रधानमंत्री स्वयं कर रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा के लिए यजमान द्वारा विभिन्न प्रकार के नियमों का पालन किया जाता है. मान्यता यह है कि इन नियमों का से देवी-देवताओं के आवाहन के लिए यजमान सक्षम बनता है और प्राण प्रतिष्ठा के समय देवता यजमान द्वारा किए अनुष्ठान से प्रसन्न होकर देव प्रतिमा में वास करते हैं.

प्राण प्रतिष्ठा से पहले प्रधानमंत्री के मंदिर दौरे का क्या है आध्यात्मिक महत्व?

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प्राण प्रतिष्ठा से पहले प्रधानमंत्री के मंदिर दौरे के पीछे कई लोगों अपने मत हैं. लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से इस दौरे का विशेष महत्व है. बता दें कि आध्यात्मिक विद्वान बताते हैं कि शास्त्रों में कहा गया है कि ‘देवो भूत्वा देवम यजेत’ अर्थात देवता के समान बनकर ही देवता की पूजा करनी चाहिए.

शास्त्रों में बताया गया है कि किसी भी महत्वपूर्ण अनुष्ठान से पहले व्यक्ति को पूजा-पाठ में लिप्त रहना चाहिए और देवस्थल के दर्शन करने चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि देवस्थल में पूजा अर्चना करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और दर्शन से बाह्य शुद्ध यानि शरीर की शुद्धि होती है. वहीं अन्न और जल का त्याग करने से आंतरिक शुद्धि होती है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री के दक्षिण के विभिन्न मंदिरों के दौरे को इतना महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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