
Shantanoo Mishra
नमस्कार, मैं शांतनू मिश्र, India.Com हिंदी में सब एडिटर के पद कार्यरत हूं. मेरे पास डिजिटल मीडिया में लगभग 04 वर्षों का अनुभव है. इससे पहले, मैं दैनिक जागरण (डिजिटल), ... और पढ़ें
Ayodhya Ram Mandir Pran Pratishtha Day 4: भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर के उद्घाटन (Ram Mandir Inaugration) के लिए वैदिक अनुष्ठान शुरू हो चुके हैं. इसी क्रम में आज यानी 19 जनवरी के दिन श्री राम मंदिर में औषधाधिवास, केसराधिवास और घृताधिवास अनुष्ठान किया जाएगा. मंत्रोच्चारण के साथ श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा (Ramlala Pran Pratishtha) के लिए हो रहे अनुष्ठान को पूरा किया जाएगा. आइए आचार्य श्याम चंद्र मिश्र जी जानते हैं, क्या है अधिवास का महत्व और आज के शुभ योग?
आचार्य मिश्र बताते हैं ,कि वैदिक धर्म ग्रंथों में यह बताया गया है कि देव प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा से पहले संसार में पाई जाने वाले सभी पवित्र तत्वों का अधिवास देव प्रतिमा में किया जाना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इन्हीं महत्वपूर्ण तत्वों से जीवन का उत्सर्जन होता है. जब वैदिक मंत्रों के साथ देव प्रतिमा में औषधाधिवास, केसराधिवास समेत अन्य अधिवास किए जाते हैं, तभी प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया पूरी होती है. आज यानी 19 जनवरी के दिन सुबह औषधाधिवास, केसराधिवास और घृताधिवास का अनुष्ठान किया जाएगा. इस दौरान औषधि, केसर और घी का देव प्रतिमा में अधिवास कराया जाएगा. इसके बाद संध्या काल में धन्याधिवास अनुष्ठान किया जाएगा, जिसमें सात धान्यों का अधिवास किया जाएगा.
वैदिक पंचांग के अनुसार औषधाधिवास, केसराधिवास और घृताधिवास के समय साध्य योग का निर्माण हो रहा है. बता दें कि साध्य योग दोपहर 12:46 तक रहेगा और इसके बाद शुभ योग का निर्माण होगा. यह योग संध्या काल में धन्याधिवास के समय भी रहेगा. इसके साथ इस दौरान बालव और कौलव दोनों करण का निर्माण हो रहा है.
आचार्य मिश्र बताते हैं कि शास्त्रों में विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान और पूजा-पाठ के विषय में बताया गया है. साथ ही यह भी बताया गया है कि यदि किसी धार्मिक स्थल या घर में देव प्रतिमा को स्थापित किया जाता है तो इससे पहले देव प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा जरूर की जाती है. इस दौरान कई विशेष नियमों का पालन किया जाता है और प्राण प्रतिष्ठा से पहले विभिन्न प्रकार के तत्वों को प्रतिमा में अधिवास कराया जाता है. ऐसा करने से देव प्रतिमा सभी तत्वों से पूर्ण हो जाती है और प्राण प्रतिष्ठा के समय विग्रह में स्वयं भगवान वास करते हैं. इसी वजह से रामलला के प्राण प्रतिष्ठा (Ramlala Pran Pratishtha) से पहले चार दिन केवल प्रमुख तत्वों का अधिवास विधिपूर्वक कराया जाएगा, जिसमें- जल, केसर, घी, सुगंध, पुष्प इत्यादि शामिल हैं.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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