नई दिल्ली: इस्लाम का सबसे पाक साफ़ महीना रमजान का होता है. यह महीना अब दस्तक देने के लिए तैयार है. इस महीने में दुनियाभर के मुस्लिम व्रत यानी रोज़ा रखते हैं और इबादत करते हैं. रमजान के महीने में मुस्लिम समाज के लोग 29 से 30 दिनों तक रोजा रखते हैं. सुबह सूर्य उगने से पहले सहरी खाते हैं और सूर्य ढलने के बाद इफ्तार करते हैं. इस बीच वह ना तो कुछ खा सकते हैं और ना ही कुछ पी सकते हैं. यह महीना जहां एक तरफ आपको अपने ज़हन और दिल पर काबू करना सिखाता है वहीं दूसरी तरफ आपको इबादत करने की तालीम देता है. Also Read - Eid ul Fitr 2020 : आज बंद रहेगी जामा मस्जिद, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने घर पर ही अदा की नमाज

कब से शुरू हो रहा है ये पावन महीना ?

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने यानी रमज़ान की शुरुआत चांद देखने के बाद होती है. इस साल अगर चांद का दीदार 23 अप्रैल को हो गया तो 24 अप्रैल से रोजे रखे जाएंगे. वहीं अगर चांद 24 अप्रैल को दिखा तो 25 अप्रैल से रोजे रखे जाएंगे. Also Read - Corona और Lockdown से फीकी पड़ी ईद की रंगत, नहीं सजे बाजार, त्योहार में सूनी पड़ी सड़कें

रमज़ान के महीने में क्यों रखा जाता है रोज़ा (व्रत) ?

ऐसा माना जाता है कि यह महीना आपको ख़ुद पर क़ाबू करना सिखाता है. रमजान के दौरान लोग अपनी लालच पर नियंत्रण करते हैं और अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं, ताकि अल्लाह उनकी गलतियों को माफ कर दें. ऐसा माना जाता है कि इस महीने की गई इबादत का फल बाकी महीनों के मुकाबले 70 गुना अधिक मिलता है. इस अफ़ज़ल महीने में दिल, ज़हन, जिस्म और दिमाग को दुनियावी वहशतों से दूर रखने की कोशिश की जाती है. Also Read - Eid in Kerala 2020 Live Chand Raat: केरल में आज नजर आ सकता है ईद का चांद

जानें कौन रख सकता है रोज़ा और कौन नहीं:

-जो शारीरिक रूप से स्वस्थ हों.

– अगर यात्रा पर हैं और अस्वस्थ हैं तो रोज़ा नहीं रख सकते.

– माहवारी में महिलाएं रोज़ा नहीं रख सकतीं. लेकिन बाद में उन्हें उतने दिन पूरे करने होंगे.

– बुजुर्ग और अस्वस्थ लोग व्रत नहीं रख सकते, लेकिन फिदिया जरूर करें.

– गर्भवती महिलाएं और नई-नई मां बनने वाली महिलाएं, जो बच्चे को दूध पिलाती हैं, वह व्रत नहीं रख सकतीं.