नई दिल्ली: पूरा देश इस वक़्त कोरोना वायरस जैसी बिमारी का सामना कर रहा है. इस महामारी से अब तक हज़ारों लोग संक्रमित हो चुके हैं वहीं पांच सौ से ज़्यादा लोगों की जान गई है. इस प्रकोप को रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन लागू कर दिया गया है और इसका पालन भी सख्ती से किया जा रहा है लेकिन इस बीच मुस्लिम समुदाय का पावन महीना रमज़ान भी दस्तक देने को तैयार है. इस पवित्र महीने पर लॉकडाउन का भी खासा असर पड़ेगा. इस मुबारक महीने की शुरुआत का ऐलान (संभवत: 24 अप्रैल शनिवार) को चांद दिखने के बाद होगा. Also Read - लॉकडाउन 4.0 के लास्ट फेज में मनीष मल्होत्रा ने इन शहरों में खोली स्टोर्स, कहा-भलाई के लिए है! 

यह महीना जहां एक तरफ आपको अपने ज़हन और दिल पर काबू करना सिखाता है वहीं दूसरी तरफ आपको इबादत करने की तालीम देता है लेकिन मौजूदा लॉकडाउन के मद्देनज़र बंदिशें और बढ़ गई हैं. बाज़ार और मस्जिद के बंद होने से रोज़ेदारों को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन ऐसे हालात में कई उलेमाओं ने भी यह कहा है कि इस रमज़ान आप अपने घर पर रहकर ही इबादत करें और नमाज़ पढ़ें. Also Read - इस राज्य में लॉकडाउन 4.0 के बाद एक जून से खुल सकते हैं मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर, सरकार बना रही रणनीति

इंसान को हैवानी सिफात से निकाल कर रहमानी सिफात व रब्बानी अखलाक से संवारने वाला यह पाकीजा अमल इस साल अपने चार दीवारों में ही करना अफ़ज़ल माना जा रहा है. इमाम मो. निजामुद्दीन ने कहा कि पूरे लॉकडाउन के दौरान घर में अपने परिवार के साथ तारावीह की नमाज पढ़ें. दिन में रोजा रखें और तमाम बुराइयों से तौबा करें. लोगों की, दीनहीनों की, भूखों की हर संभव मदद करें. Also Read - कोरोना से बिगड़े आर्थिक हालात, चीन को छोड़कर उभरती अर्थव्यवस्थाओं में चालू वित्त वर्ष में 4.5 प्रतिशत की आएगी गिरावट : फिच रेटिंग्स

दुनिया के कई मुस्लिम देशों ने रमज़ान को ध्यान में रखते हुए कई कदम भी उठाए हैं. ईरान ने तो अपने लोगों से रमज़ान के महीने में अपने पड़ोसियों की ख़ास तौर पर मदद की अपील की है. भारत में भी इस मुश्किल वक़्त में रमज़ान की फ़ज़ीलत को समझते हुए लोगों से यह आग्रह किया गया है कि इस पाक साफ महीने को अपने घर पर रहकर ही गुज़ारें. जो लोग इस महीने में ज़कात का पैसा निकालते हैं वो इस पैसे को प्रधानमंत्री राहत कोष में भी जमा कर सकते हैं.