Ramayan Katha: हनुमान जी को क्यों अर्पित किया जाता है तुलसी का पत्ता? जानें इसके पीछे छिपी कहानी और तुलसी चढ़ाने का सही तरीका

Ramayan Katha: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी का तुलसी का पत्ता अर्पित करने से रोग व दोष से मुक्ति मिलती है. तुलसी के पत्ते के बिना हनुमान जी का भोग अधूरा माना जाता है.

Published date india.com Published: December 2, 2025 4:06 PM IST
Ramayan Katha: हनुमान जी को क्यों अर्पित किया जाता है तुलसी का पत्ता? जानें इसके पीछे छिपी कहानी और तुलसी चढ़ाने का सही तरीका

Ramayan Katha: कहते हैं कि हनुमान जी तुलसी बेहद ही प्रिय है और इसलिए उनकी पूजा में तुलसी का पत्ता जरूर इस्तेमाल किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी को तुलसी का पत्ता अ​र्पित करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आ रहे कष्टों से भी मुक्ति मिलती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर हनुमान जी को तुलसी इतनी प्रिय क्यों है? इसका जवाब रामायण की कथाओं में छिपा हुआ है.

हनुमान जी को क्यों पसंद है तुलसी का पत्ता?

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे तो उनका राज्याभिषेक किया गया. इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती श्रीराम से मिलने अयोध्या पहुंचे तो माता सीता ने उनका खूब आदर-सत्कार किया. लेकिन भगवान शिव वहां कहीं भी हनुमान जी नजर नहीं आए तो उन्होंने माता सीता से उनके बारे में पूछा. तब सीता जी ने बताया कि हनुमान जी बाग में आराम कर रहे हैं, यह सुनकर भगवान शिव बाग में हनुमान जी से मिलने पहुंच गए.

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भगवान शिव जैसे ही हनुमान जी से मिलने बाग में पहुंचे तो बेहद ही अद्भुत नजारा देखकर हैरान रह गए. बाग में हनुमान जी सो रहे थे और उनकी सांस से राम नाम की ध्वनि निकलकर चारों ओर फैल रही थी. शिवजी भी उस ध्वनि में खो गए और नाचने लगे. उसी समय लक्ष्मण जी भगवान शिव और हनुमान जी को बुलाने आए तो वह भी राम नाम की धुन में मगन होकर नाचने लगे. काफी समय बाद भी जब तीनों में से कोई भी महल में नहीं पहुंचा तो प्रभु राम स्वंय हनुमान जी बुलाने आए और वहां का नजारा देखकर अचंभित रह गए. उन्होंने हनुमान जी को उठाया और जैसे ही हनुमान जी की नींद टूटी वह प्रभु श्रीराम को दखकर तुरंत खड़े हो गए.

इसके बाद सभी महल में खाना खाने पहुंचे तो माता सीता से हनुमान जी को भी खाने के लिए बिठा दिया. हनुमान जी भगवान राम से पहले भोजन नहीं करते थे लेकिन माता सीता की आज्ञा को भी नहीं टाल सकते थे. इसलिए उन्होंने खाना खाना शुरू किया लेकिन उनका पेट भरा ही नहीं, जिसे देखकर माता सीता परेशान हो गईं तो भगवान राम ने कहा कि हनुमान जी के भोजन में तुलसी का पत्ता मिला दें. जैसे ही हनुमान जी तुलसी के पत्ते वाला खाना खाया उनकी भूख शांत हो गई. कहते हैं कि तभी से हनुमान जी को तुलसी अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है.

हनुमान जी को कैसे अर्पित करें तुलसी?

  • हनुमान जी की पूजा करते समय तुलसी के पत्ते अर्पित करना शुभ माना जाता है. हनुमान जी को तुलसी अर्पित करते समय 108 तुलसी के पत्ते लें और उसकी माला बनाकर हनुमान जी को ​अर्पित करें.
  • इसके अलावा 5, 11, 21 या 51 तुलसी के पत्तों पर चंदन से राम नाम लिखें और हनुमान जी को अर्पित करें. कहते हैं कि इससे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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