
Renu Yadav
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें
Ramayan Ki Kahani: धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री राम के प्रति जैसी भक्ति हनुमान जी में थी वैसी कोई और नहीं कर सकता. हनुमान जी का भगवान राम से कुछ ऐसा रिश्ता था कि वह क्षणभर भी उनसे दूर नहीं रह पाते थे. इसलिए लोगों के मन में यह जानने की काफी उत्सुकता है कि जब भगवान श्री राम ने जल समाधि ली तो उनके प्रिय भक्त हनुमान जी उस वक्त कहां थे और उन्होंने उनके सााि जल समाधि क्यों नहीं ली? आइए जानते हैं क्या है यह कथा.
भगवान राम स्वंय भगवान विष्णु का ही अवतार थे और उन्होंने धरती पर सत्य और धर्म की रक्षा के लिए जन्म लिया था. भगवान श्री राम ने धरती से दुष्टों का नाश और धर्म की स्थापना की. जब भगवान श्री राम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ 14 वर्ष के वनवास पर गए थे तो वहां जंगलों में भी उन्होंने दुष्टों का संहार किया. इसी दौरान लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसके चंगुल से छुड़ाया. इसी दौरान उनकी मुलाकात अपने परम भक्त हनुमान से हुई. वनवास समाप्त होने के हनुमान जी भी अपने भगवान श्री राम के साथ अयोध्या आ गए. श्री राम ने कई वर्षों तक अयोध्या में राज किया.
मनुष्य धरती पर आता है तो उसे एक दिन अपना देह त्यागना पड़ता है. इसी तरह भगवान श्री राम को प्रकृति के इस नियम को पालन कर अपना मानव शरीर त्यागना था. जब उन्हें लगा कि धरती पर रहने पर कार्य पूरा हो गया है तो उन्होंने अपनी देह त्यागने का निर्णय लिया और सरयू नदी में जाकर जल समाधि ली जिसके बाद वह बैकुंठ को चले गए.
ऐसे में सवाल उठता है कि भगवान श्री राम के जल समाधि लेने के बाद हनुमान जी का क्या हुआ? कुछ ग्रंथों में कहा गया है जब प्रभु श्री राम ने जल समाधि लेने का निर्णय लिया तो उन्हें पता था कि हनुमान जी उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे और उनके साथ ही स्वंय भी समाधि ले लेंगे. जबकि श्री राम चाहते थे कि हनुमान जी धरती पर ही रहें. इसलिए उन्होंने हनुमान जी को किसी अन्य कार्य में उलझाने के बारे में सोचा और उनसे महल के फर्श की दरार में अंगूठी खो जाने का बहाना बनाया. हनुमान जी अपने प्रभु श्री राम की अंगूठी ढूंढने में व्यस्त हो गए. हनुमान जी अंगूठी ढूंढते हुए नागलोक तक चले गए जहां नागों के राजा वासुकी को अपने आने की वजह बताई.
तब वासुकी जी ने उन्हें ढेरों अंगूठियां दिखाई तो वहां हर दूसरी अंगूठी पर श्री राम लिखा हुआ था. जिसे देखकर हनुमान जी समझ गए कि प्रभु श्री राम ने यह सब जानबूझ कर किया है ओर फिर वह बहुत उदास हुए. उन्हें उदास देखकर नागराज वासुकी ने समझाया कि भगवान श्री राम को यह संसार छोड़कर वैकुंठ जाना था और अब तक वह अपना शरीर त्याग चुके होंगे.
यह सुनने के बाद हनुमान जी ने अयोध्या ना लौटने का फैसला किया और किंपुरुष चले गए. श्रीमद्भागवतम् में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि हनुमान जी किंगुरुष लोक में रहते हैं जो कि स्वर्ग के ही समान है. इस लोक में गंधर्वों के समूह हमेशा भगवान श्री राम के गुणों का गान करते रहते हैं. हनुमान जी इस लोक के प्रमुख हैं वे हमेशा भगवान राम के नाम में मगन रहते हैं. इसके अलावा ब्रह्म वैवर्त पुराण में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि हनुमान जी किंपुरुष लोक में रहते हैं.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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