नई दिल्ली: रमजान के पाक साफ़ महीने का आखिरी अशरा हम सब के बीच है. इस महीने के आखिरी जुमा यानी शुक्रवार को अलविदा जुमा (Alvida Juma)कहते हैं जोकि कल है. यह जुमा एहसास दिलाता है कि रमजान (Ramzan) का ये अफ़ज़ल और नेक महीना हमारे बीच से रुखसत हो रहा है. इस दिन मुस्लिम धर्म के लोग ज़ोहर के वक़्त अलविदा जुमा की नमाज़ पढ़ते हैं. लेकिन इस बार मंज़र ही कुछ और है. Also Read - Eid ul Fitr 2020 : आज बंद रहेगी जामा मस्जिद, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने घर पर ही अदा की नमाज

कोरोनावायरस की वजह से देशभर में लॉकडाउन लागू है. ऐसे में किसी भी धार्मिक स्थल पर जमा होना सख्त मना है. इस वजह से मुस्लिम बंधुओं को अपने घरों के अंदर रहकर ही इबादत करना है. हालांकि जुमे की और ईद की नमाज़ बाकी नमाज़ से थोड़ी अलग होती है इसलिए इसे घर पर पढ़ना मुश्किल होता है. इन दोनों नमाज़ों के लिए क़ुत्बा ज़रूरी होता है और क़ुत्बा हर किसी के ज़हन में कैद नहीं हो सकता है. ये एक तरीके की तक़रीर होती है जिसमें दुआएं शामिल होती हैं. Also Read - Corona और Lockdown से फीकी पड़ी ईद की रंगत, नहीं सजे बाजार, त्योहार में सूनी पड़ी सड़कें

भारत में सुन्नी मुसलमानों में हनफी मस्लक के मानने वाले ज्यादा हैं और उनके यहां जुमे की नमाज के लिए कम से कम चार लोगों की शर्त है. और दूसरी शर्त ये है कि जहां नमाज़ पढ़ी जाए वो जगह खुली खुली सी हो, बंद कमरे की तरह नहीं और तीसरी शर्त जो सबसे अहम है कि क़ुत्बे का याद होना. अगर कोई भी इंसान इन शर्तों को पूरा करता है तो वो जुमे की नमाज़ और अलविदा की नमाज़ घर पर ही अदा कर सकता है. Also Read - Eid in Kerala 2020 Live Chand Raat: केरल में आज नजर आ सकता है ईद का चांद