Ravi Pradosh 2020: हिंदू धर्म में जितना महत्व एकादशी व्रत का है, उतना ही प्रदोष व्रत का भी है. प्रदोष व्रत से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस बार का प्रदोष व्रत, रवि प्रदोष व्रत है.

जो प्रदोष व्रत रविवार को आता है उसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.

इस बार रवि प्रदोष 5 अप्रैल को है. रवि प्रदोष के दिन भगवान सूर्य और भोलेनाथ की पूजा की जाती है. प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक होती है.

रवि प्रदोष व्रत कथा

एक समय भागीरथी के तट पर ऋषि समाज द्वारा विशाल गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस सभा में सूतजी महाराज पधारे. सूतजी को आते देखकर शौनकादि 88,000 ऋषि-मुनियों ने खड़े होकर उन्हे प्रणाम किया.

सूतजी ने ऋषियों को आशीर्वाद दिया. विद्वान ऋषिगण और सब शिष्य आसनों पर विराजमान हो गए. शौनकादि ऋषि ने पूछा- हे पूज्यवर! कृपया बताने का कष्ट करें कि मंगलप्रद, कष्ट निवारक यह व्रत सबसे पहले किसने किया और उसे क्या फल प्राप्त हुआ.

सूतजी बोले- आप सभी शिव के परम भक्त हैं, आपकी भक्ति को देखकर मैं व्रती मनुष्यों की कथा कहता हूं. ध्यान से सुनो.

एक गांव में अति दीन ब्राह्मण निवास करता था.उसकी साध्वी स्त्री प्रदोष व्रत किया करती थी. उसे एक ही पुत्ररत्न था. एक समय की बात है, वह पुत्र गंगा स्नान करने के लिए गया.
दुर्भाग्यवश मार्ग में चोरों ने उसे घेर लिया और वे कहने लगे कि हम तुम्हें मारेंगे नहीं, तुम अपने पिता के गुप्त धन के बारे में हमें बता दो. बालक दीनभाव से कहने लगा कि बंधुओं! हम अत्यंत दु:खी हैं. हमारे पास धन कहां है? तब चोरों ने कहा कि तेरे इस पोटली में क्या बंधा है? बालक ने नि:संकोच कहा कि मेरी मां ने मेरे लिए रोटियां दी हैं.

यह सुनकर चोरों ने अपने साथियों से कहा कि साथियों! यह बहुत ही दु:खी मनुष्य है अत: हम किसी और को लूटेंगे. इतना कहकर चोरों ने उस बालक को जाने दिया. बालक वहां से चलते हुए एक नगर में पहुंचा.

नगर के पास एक बरगद का पेड़ था. वह बालक उसी बरगद के वृक्ष की छाया में सो गया. उसी समय उस नगर के सिपाही चोरों को खोजते हुए उस बरगद के वृक्ष के पास पहुंचे और बालक को चोर समझकर बंदी बना राजा के पास ले गए. राजा ने उसे कारावास में बंद करने का आदेश दिया.

ब्राह्मणी का लड़का जब घर नहीं लौटा, तब उसे अपने पुत्र की बड़ी चिंता हुई. अगले दिन प्रदोष व्रत था. ब्राह्मणी ने प्रदोष व्रत किया और भगवान शंकर से मन-ही-मन अपने पुत्र की कुशलता की प्रार्थना करने लगी.

भगवान शंकर ने उस ब्राह्मणी की प्रार्थना स्वीकार कर ली.उसी रात भगवान शंकर ने उस राजा को स्वप्न में आदेश दिया कि वह बालक चोर नहीं है, उसे प्रात:काल छोड़ दें अन्यथा उसका सारा राज्य-वैभव नष्ट हो जाएगा.

प्रात:काल राजा ने शिवजी की आज्ञानुसार उस बालक को कारावास से मुक्त कर दिया. बालक ने अपनी सारी कहानी राजा को सुनाई. सारा वृत्तांत सुनकर राजा ने अपने सिपाहियों को आदेश देकर उस बालक के घर भेजा और उसके माता-पिता को राजदरबार में बुलाया.

उसके माता-पिता बहुत भयभीत थे. राजा ने उन्हें भयभीत देखकर कहा कि आप भयभीत न हों आपका बालक निर्दोष है. राजा ने ब्राह्मण को 5 गांव दान में दिए जिससे कि वे सुखपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकें. भगवान शिव की कृपा से ब्राह्मण परिवार आनंद से रहने लगा.

जो भी मनुष्य रवि प्रदोष व्रत करता है, वह प्रसन्न व निरोग होकर अपना पूर्ण जीवन व्यतीत करता है.