Ravidas Jayanti 2019 इस बार 19 फरवरी को मनाई जाएगी. संत रैदास जयंती को लोग हर साल बड़े उत्‍साह से मनाते हैं. Also Read - Ravidas Jayanti 2019: कब है संत रविदास जयंती, जानिए इनका पूरा जीवन परिचय

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कौन थे संत रविदास

गुरु रविदास को रैदास भी कहा जाता है. उन्‍हें महान संत, दार्शनिक, कवि, समाज सुधारक और भक्‍त के तौर पर जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह की पूर्णिमा के दिन गुरु रविदास जयंती मनाई जाती है.

मीरा के गुरु

ऐसा कहा जाता है कि संत रविदास ही मीरा के गुरु थे.  मीराबाई उनसे काफी प्रेरित थीं. कई कहानियों में उल्‍लेख मिलता है कि उन्‍होंने कई बार मीरा की जान बचाई. साथ ही उन्‍हें भक्‍त‍ि का ज्ञान भी दिया.

संत रैदास के दोहे (अर्थ सहित)

मन चंगा तो कठौती में गंगा

अर्थ- अगर आपका मन और हृदय पवित्र है तो ईश्वर आपके हृदय में निवास करते हैं.

 

जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात,

रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात

अर्थ- जिस तरह केले के तने को छीला जाये तो पत्ते के नीचे पत्ता फिर पत्ते के नीचे पत्ता और अंत में कुछ नही निकलता, लेकिन पूरा पेड़ खत्म हो जाता है. ठीक उसी तरह इंसान को भी जातियों में बांट दिया गया. इन जातियों के विभाजन से इन्सान तो अलग-अलग बंट जाता है और अंत में इन्सान भी खत्म हो जाते हैं लेकिन ये जाति खत्म नही होती.

 

Ravidas Jayanti 2019: कब है संत रविदास जयंती, जानिए इनका पूरा जीवन परिचय

 

हरि-सा हीरा छांड कै, करै आन की आस

ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास

अर्थ- हीरे से बहुमूल्य हरि यानि ईश्वर को छोड़कर लोग अन्य चीजों की आशा करते हैं. ऐसे लोगों को नर्क जाना पड़ता है. यानी प्रभु की भक्ति को छोडकर कहीं और भटकना व्यर्थ है.

 

करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस

कर्म मानुष का धर्म है, सत् भाखै रविदास

अर्थ–हमें हमेशा कर्म में लगे रहना चाहिए और कभी भी कर्म के बदले मिलने वाले फल की आशा नही छोड़नी चाहिए क्‍योंकि कर्म करना हमारा धर्म है तो फल पाना हमारा सौभाग्य है.

रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच,

नर कूँ नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच

अर्थ- सिर्फ जन्म लेने से कोई नीच नही बन जाता है, इन्सान के कर्म ही उसे नीच बनाते हैं.

 

कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै

तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै

अर्थ– ईश्वर की भक्ति बड़े भाग्य से प्राप्त होती है. यदि आपमें थोड़ा सा भी अभिमान नही है तो निश्चित ही आपका जीवन सफल रहता है ठीक वैसे ही जैसे एक विशालकाय हाथी शक्कर के दानो को बिन नही सकता लेकिन एक तुच्छ सी दिखने वाली चींटी शक्कर के दानों को आसानी से बिन लेती है.

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