Sabarimala Mandir: सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज जो फैसला सुनाया है. वह ऐतिहासिक है. अब तक सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित था. दरअसल, ऐसी मान्यता है कि सबरीमाला मंदिर में जिस भगवान अयप्पा की पूजा होती है, उन्होंने कभी शादी नहीं की. इसलिए मंदिर में उन किशोरियों और महिलाओं को एंट्री नहीं मिलती है, जिन्हें माहवारी होती है. Also Read - Coronavirus, Lockdown: रोड पर भूखे वाहन चालकों को खिला रहे खाना ये दो ड्राइवर

सबरीमाला मंदिर पर फैसला आने के बाद इस मंदिर के बारे में जानने की इच्छा जरूर आपके भी मन में होगी. यहां हम आपके लिए इस मंदिर के बारे में कुछ ऐसे तथ्य लेकर आए हैं, जिसके बारे में आपको जरूर पता होना चाहिए. Also Read - केरल में शराब खरीदने के विशेष पास पर कोर्ट ने लगाई रोक, कहा- यह निराशाजनक..

1. पौराणिक मान्नयता है कि भगवान अयप्पा भगवान शंकर और मोहिनी (विष्णु जी का एक रूप) का पुत्र हैं. इन्हें हरिहरपुत्र के नाम से भी जाना जाता है. दरअसल, हरि भगवान विष्णु को कहते हैं और हर शिव को. इन दोनों के नामों के आधार पर ही हरिहरपुत्र नाम रखा गया. Also Read - Coronavirus Delhi: तबलीगी जमात में भाग लेने वाले 300 संदिग्धों की केरल में हुई पहचान

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वास्तव में यह मंदिर शैव और वैष्णवों दोनों के लिए एक बीच का रास्ता बनाता है और इस मंदिर को बनाने का मकसद भी यही था कि दोनों के बीच के फासले को कम किया जा सके.

2. सबरीमाला का मलयालम में अर्थ होता है पर्वत. यह मंदिर जंगल के बीच में है और यहां तक का सफर भक्तों को चलकर ही पूरा करना होता है. इसलिए इस मंदिर को दक्षिण का तीर्थ भी कहा जाता है.

3. भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है.

4. यह मंदिर करीब 800 साल पुराना है और यहां सभी पंथ के लोग आ सकते हैं. यहां ना केवल भारत से, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों से लोग यहां दर्शन करने आते हैं.

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5. सबरीमाला मंदिर जाने की सबसे बड़ी शर्त है 41 दिनों का व्रत. सबरीमाला मंदिर में सिर्फ उन्हें प्रवेश दिया जाता है, जिन्होंने 40 दिनों तक संयमित जीवन जिया है. यानी इन 41 दिनों के दौरान यौन संबंधन बनाना वर्जित होता है, दाढ़ी नहीं करनी होती है, सात्विक भोजन खाना होता है और जिस दिन से यह व्रत शुरू होता है, उसी दिन उस व्यक्ति को एक माला अपने गले में पहननी होती है. यह माला रुद्राक्ष या मोती की माला हो सकती है.

6. इन 41 दिनों के दौरान व्रत रखने वाले व्यक्ति के ऊपर उस महिला की छाया भी नहीं पड़नी चाहिए, जिसे माहवारी है. और महिलाओं की माहवारी 30 दिनों पर आ जाती है, इसलिये उनका व्रत पूरा नहीं हो पाता. मंदिर में संभवत: इसी वजह से महिलाओं को प्रवेश प्राप्त नहीं होता.

7. 41 दिनों का व्रत करने के बाद ही मंदिर की 18 पवित्र सीढ़ियों पर चढ़ने की अनुमति मिलती है. ये 18 सीढ़ियां सोने की बनी हुई हैं.

8. आमतौर पर मंदिर में लोग काले रंग के कपड़े पहनकर नहीं जाते, लेकिन सबरीमाला मंदिर में काले या नीले रंग के कपड़े पहनकर जाते हैं.

9. हर साल मंदिर में नवम्बर से जनवरी तक श्रद्धालुओं के लिए अयप्पा भगवान के दर्शन का द्वार खुला रहता है.

10. अयप्पा भगवान को लेकर एक कहानी बेहद प्रचलित है जो मंदिर की वेबसाइट पर भी मौजूद है.

मंदिर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी की मानें तो मंदिर का निर्माण कई हजार साल पहले राजा राजसेखरा ने कराया था. उन्हें पंपा नदी के किनारे अयप्पा भगवान बाल रूप में मिले थे इसके बाद वो उन्हेंं अपने साथ महल ले आए थे.

इसके कुछ समय बाद ही रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया. लेकिन अयप्पा जी के बड़े होने के कारण राजा उन्हें राज सौंपना चाहते थे. लेकिन रानी छोटे बेटे को राजा बनाना चाहती थी.

इसके लिए एक बार रानी ने अपनी तबीयत खराब होने का बहाना बनाया और कहा कि उनकी बीमारी केवल शेरनी के दूध से ही ठीक हो सकती है. इस पर अयप्पा जी जंगल में दूध लेने चले गए.

इस दौरान उनका सामना एक राक्षसी से हुआ जिसे उन्होंंने मार गिराया. इससे खुश होकर इंद्र ने उनके साथ शेरनी को महल में भेज दिया. शेरनी को उनके साथ देखकर लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ.

इसके बाद पिता ने अयप्पा को राजा बनने को कहा तो उन्होंंने इससे मना कर दिया. इसके बाद वो वहां से गायब हो गए. इससे दुखी होकर उनके पिता ने खाना त्याग दिया.

इसके बाद भगवान अयप्पा ने पिता को दर्शन दिए और इस स्थान पर अपना मंदिर बनवाने को कहा. इसके बाद इस जगह पर मंदिर का निर्माण कराया गया था.

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