Sankashti Chaturthi 2019: हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध त्यौहारों में से एक है संकष्टी चतुर्थी. हिन्दू मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है. भगवान गणेश को अन्य सभी देवी-देवतों में प्रथम पूजनीय माना गया है. इन्हें बुद्धि, बल और विवेक का देवता का दर्जा प्राप्त है. भगवान गणेश अपने भक्तों की सभी परेशानियों और विघ्नों को हर लेते हैं इसीलिए इन्हें विघ्नहर्ता और संकटमोचन भी कहा जाता है. वैसे तो हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए ढेरों व्रत-उपवास आदि किए जाते हैं, लेकिन भगवान गणेश के लिए किए जाने वाला संकष्टी चतुर्थी व्रत काफ़ी प्रचलित है. मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की पूजा करने से सभी के कष्ट मिट जाते हैं.

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दिसंबर में कब है संकष्टी चतुर्थी?
हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी हर महीने में दो बार आती है जिसे लोग बहुत श्रद्धा से मनाते हैं. पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं, वहीं अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना करने के लिए विशेष दिन माना गया है. अगहन पूर्णिमा के बाद आगामी 15 दिसंबर को संकष्टी चतुर्थी पड़ रही है, जबकि 29 दिसंबर को विनायक चतुर्थी पड़ रही है.

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संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

  1. इस दिन आप प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठ जाएँ.
  2. व्रत करने वाले लोग सबसे पहले स्नान कर साफ़ और धुले हुए कपड़े पहन लें. इस दिन लाल रंग का वस्त्र धारण करना बेहद शुभ माना जाता है और साथ में यह भी कहा जाता है कि ऐसा करने से व्रत सफल होता है.
  3. स्नान के बाद वे गणपति की पूजा की शुरुआत करें. गणपति की पूजा करते समय जातक को अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए.
  4. सबसे पहले आप गणपति की मूर्ति को फूलों से अच्छी तरह से सजा लें.
  5. पूजा में आप तिल, गुड़, लड्डू, फूल ताम्बे के कलश में पाप, धुप, चन्दन, प्रसाद के तौर पर केला या नारियल रख लें.
  6. ध्यान रहे कि पूजा के समय आप देवी दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति भी अपने पास रखें. ऐसा करना बेहद शुभ माना जाता है.
  7. गणपति को रोली लगाएं, फूल और जल अर्पित करें.
  8. संकष्टी को भगवान् गणपति को तिल के लड्डू और मोदक का भोग लगाएं.
  9. पूजा के बाद आप फल, मूंगफली, खीर, दूध या साबूदाने को छोड़कर कुछ भी न खाएँ. बहुत से लोग व्रत वाले दिन सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं लेकिन आप सेंधा नमक नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करें.
  10. शाम के समय चांद के निकलने से पहले आप गणपति की पूजा करें और संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें.
  11. पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद बाटें. रात को चाँद देखने के बाद व्रत खोला जाता है और इस प्रकार संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण होता है.

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संकष्टी चतुर्थी पर करें इस मंत्र का जाप
गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्.
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्

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